जम्मू। जम्मू-कश्मीर की नई औद्योगिक नीति में मौजूदा और कार्यशील सूक्ष्म व लघु औद्योगिक इकाइयों को नजरअंदाज करने का फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीज ने विरोध किया है। फेडरेशन ने बाहरी निवेशकों की तरह मौजूदा और कार्यशील औद्योगिक इकाइयों को भी प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देने की मांग की है। उन्होंने यूटी बनने के बाद स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। फेडरेशन ने प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल से नई औद्योगिक नीति में संशोधन की मांग की है।
फेडरेशन के चेयरमैन ललित महाजन ने कहा कि नई औद्योगिक नीति की अधिसूचना में सरकार बाहर से आने वाली इकाइयों को प्लांट व मशीनरी के निवेश पर 300 फीसदी के जीएसटी प्रतिपूर्ति का लाभ दे रही है, लेकिन मौजूदा और कार्यशील इकाइयों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। पिछले तीस वर्षों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और दूसरी गंभीर चुनौतियों के बीच स्थानीय इकाइयां उत्पादन के साथ हजारों लोगों को रोजगार दे रही हैं। जीएसटी के बाद केंद्रीय और राज्य वित्तीय प्रोत्साहन में कटौती हुई है। 8 जुलाई 2017 के बाद स्थापित हुई इकाइयों को राज्य वित्तीय प्रोत्साहन नहीं दिया गया है। इससे कई इकाइयां बंद होने के कगार पर हैं। नए औद्योगिक पैकेज की घोषणा में मौजूदा और नए निवेश को प्रोत्साहन देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अधिसूचना में ऐसा नहीं है। 1 जनवरी 2020 को टोल टैक्स खत्म किया गया था, तब स्थानीय इकाइयों को मुआवजे के उद्देश्य से समिति का गठन किया गया, लेकिन आज तक कुछ नहीं हो पाया है। नई इकाइयों में कार्यशील पूंजी पर 5 फीसदी का ब्याज सबवेंशन भी प्रोत्साहन के पैकेज का हिस्सा था।
ललित महाजन ने स्टेट एक्साइज नीति पर भी सवाल उठाए। इसमें बाटलिंग आदि के निर्यात पर एक्साइज ड्यूटी लगाई जा रही है। लाइसेंस का नवीकरण न होने से फार्मा जैसे क्षेत्र परेशान हैं। स्थानीय इकाइयों की मूल्य और खरीद को तवज्जो नहीं दी जा रही है। वित्त विभाग के पास उद्योगों से जुड़े मसले हल नहीं हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि राज्य के बाहर से कच्चे माल के आयात पर रोड फ्रेट प्रतिपूर्ति दी जाए। जम्मू-कश्मीर के भीतर अपने उत्पादों को बेचने वाली इकाइयों को टर्नओवर प्रोत्साहन दिया जाए। जीएसटी प्रतिपूर्ति लंबित भुगतान मामलों का निपटारा करे। इस दौरान फेडरेशन पदाधिकारियों में जितेंद्र, विजय अग्रवाल, अजीत लाल बाबा, तरुण सिंगला, अजय लंगर, विराज मल्होत्रा आदि मौजूद रहे।