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नशे की दल दल में फंस रहे प्रदेश के युवा

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के युवा तेजी से नशे की दल दल में फंसते जा रहे हैं। हेरोइन के महंगे नशे का चलना अधिक बढ़ा है। इसके साथ ब्यूपरीनारफीन, डाइजीपाम, फिनारगन आदि नशों को भी युवा इंजेक्शन के माध्यम से लेकर अपनी लत पूरी कर रहे हैं। इन नशों की गिरफ्त में युवतियां भी हैं। अकेले जम्मू में ही हर माह ऐसे नशों के औसतन 60 नए मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। ये वे मामले हैं जो साइकाइटरी अस्पताल के ओपियड सब्सिट्यूट थैरेपी (ओएसटी) केंद्र में आ रहे हैं, जबकि सैकड़ों ऐसे मामले भी हैं जो रिपोर्ट ही नहीं हो रहे हैं। ऐसे नशे से छुटकारा पाने के लिए पंजीकृत नशा मुक्ति केंद्रों की कमी के कारण भी युवाओं के सामने कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
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साइकाइटरी अस्पताल के ओएसटी केंद्र में पहुंच रहे मामलों में अधिकतर हेरोइन से जुड़े हैं, यानी प्रदेश में इस सफेद नशे की लत में तेजी से युवा फंस रहे हैं। इसमें 18 से 25 आयु वर्ग के युवा अधिक प्रभावित हैं। केंद्र में 4 युवतियां भी पंजीकृत हैं, जिनमें एक की मौत हो चुकी है और मौजूदा दो केंद्र से दवाई का सेवन कर रही हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसी युवतियां भी हैं जो निजी साइकाइटरी केंद्रों पर पहुंचकर ऐसी दवाएं ले रही हैं। केंद्र में प्रतिदिन 1-2 नए नशे के मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। अब तक ओएसटी केंद्र पर 845 पीड़ित पंजीकृत हो चुके हैं और यह आंकड़ा तेजी से ऊपर जा रहा है। यह सिर्फ जम्मू जिले का आंकड़ा है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में ऐसे नशे के मामलों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। केंद्र में पीड़ित को डॉक्टर के सामने बीमारी के हिसाब से रोजाना ब्यूपरीनारफीन टैबलेट की डोज दी जाती है। यह दवा 18 वर्ष से ऊपर वाले पीड़ितों को ही दी जा सकती है, जबकि इससे कम आयु के नशे के पीड़ितों को बाजार से दूसरी दवाई दी जाती है। केंद्र पर मौजूदा पीड़ितों को दवाई मुहैया करवाई जा रही है। केंद्र की प्रभारी डॉ. चारू बाली के अनुसार ओपीडी में प्रतिदिन 300-350 मरीज पहुंचते हैं, जिसमें अधिकतर हेरोइन के मामले होते हैं।
सामूहिक इंजेक्शन से हैपेटाइटिस, एचआईवी का खतरा बढ़ा
युवाओं में इंजेक्शन के माध्यम से सामूहिक तौर पर हेरोइन का नशा लेने से उनमें हैपेटाइटिस बी, सी, एचआईवी सहित अन्य संक्रमित बीमारियों का खतरा बढ़ा है। हाल ही में जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग की ओर से चलाए गए एक अभियान में सामने आया था कि ऐसे सामूहिक नशे में कई युवा संक्रमित बीमारियों का सिशकार हुए हैं।
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धीरे धीरे बढ़ाई जाती है डोज
हेरोइन के नशे की लत को पूरा करने के लिए पानी के साथ ड्रग्स मिलाकर इंजेक्शन से शरीर में डाल दिया जाता है। इस महंगे नशे के शौक में पहले यह ड्रग्स रोजाना 3-4 हजार रुपये में ली जाती है, लेकिन धीरे धीरे डोज बढ़ने पर इसकी कीमती मोटी होती जाती है। इस ड्रग्स से पीड़ित के फेफड़ों में इंफेक्शन रहती है।
हेरोइन से होने वाली शारीरिक समस्याएं
डोज न लेने पर शरीर में जबरदस्त दर्द होना
शरीर का टूटना, काम करने की हिम्मत न होना
नाक और मुंह से नियमित पानी चलना
कमजोरी महसूस करना आदि
लक्षण
बाथरूम में सिरिंज व अन्य नशे की दवाइयों का मिलना
देरी से उठना, चिड़चिड़ापन बढ़ना
पीड़ित का परिवार से दूरी बनाना
खाना कम खाना, व्यवहार में बदलाव आना
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. जगदीश थापा कहते हैं कि नशे की लत से दूर रखने के लिए अभिभावकों की भूमिका अहम रहती है। इसमें अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नियमित ध्यान दें। नशीनी चीजों की मांग को गंभीरता से लें। बिना वजह पैसे की मांग पर ध्यान दें। अपने बच्चों से नियमित संवाद करके उनकी समस्याएं सुलझाने की कोशिश करें।
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