जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा है कि कश्मीर घाटी में आतंकवाद का ग्राफ गिरा है। घाटी में मौजूद 300 आतंकियों की संख्या घटकर 200 पहुंच गई है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में भी आतंकवाद का ग्राफ घटे। इसके लिए जमीनी स्तर पर कड़ी लड़ाई लड़ी जा रही है।
आतंकवाद निरोधक दिवस पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पुलिस इस समय आतंकियों के साथ ही कोरोना से भी लड़ रही है। हम इन दोनों मोर्चों पर जीत हासिल करेंगे। जनता इस समय कठिन दौर से गुजर रही है, लेकिन चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आतंकवाद व कोरोना दोनों का सफाया हो। यह कठिन है, लेकिन इस पर काबू पाएंगे। वहीं, कश्मीर में आईजी विजय कुमार ने कहा कि स्थानीय युवाओं का आतंकवाद में शामिल होना और बंदूक थामना चिंता का विषय है।
पुलिस, सुरक्षा बलों, शिक्षकों, खेल विभाग तथा अभिभावकों को इस दिशा में अधिक समन्वय के साथ काम करने की जरूरत है ताकि स्थानीय युवाओं की भर्ती को रोका जा सके। यह समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घाटी को आतंकवाद मुक्त बनाना हमारा लक्ष्य है ताकि आम जनता शांतिपूर्ण माहौल में रह सके। मुठभेड़ में फंसे स्थानीय आतंकियों को समर्पण का भरपूर मौका दिया जाता है। इसके चलते ऑपरेशन को कुछ घंटे तक रोका भी जाता है।
ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि भटके युवाओं को सही रास्ते पर लाया जा सके। उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर देश और समाज की प्रगति का हिस्सा बनाया जा सके। पिछले लगभग सभी ऑपरेशनों में आतंकियों को समर्पण का पूरा समय दिया गया। इसके बाद भी जब वे नहीं माने तो उन्हें मार गिराया गया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद निरोधक दिवस पर आतंकवाद तथा इससे जुड़ी हर गतिविधियों को समाप्त करने का संकल्प लिया गया है।