जम्मू। जिंदगी की दौड़भाग के तनाव को कोरोना महामारी की पाबंदियां अवसाद में बदल रही हैं। कोरोना काल में पाबंदियों से संक्रमण को रोकने में मदद जरूर मिली, लेकिन मानसिक सेहत को यह बंदिशें नागवार गुजरी हैं। आलम ये है कि मनोचिकित्सकों के पास रोजाना पहुंचने वाले मरीजों में 50 फीसदी से ज्यादा डिप्रेशन के शिकार पाए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक है कि महीनों घरों में कैद रहने से डिप्रेशन से ग्रस्त पाए जाने वालों में बच्चे और किशोर भी शामिल हैं। डिप्रेशन की वजह से कई लोग आत्महत्या से जान भी गंवा चुके हैं। मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार डिप्रेशन बेहद संवेदनशील मुद्दा है, जिसके पीड़ित को लेकर परिवार के तमाम सदस्यों को स्नेह और देखभाल को बढ़ाना होगा।
साइकाइटरी अस्पताल के पूर्व एचओडी वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा कहते हैं कि डिप्रेशन के साथ मेनिया, स्कीजोफ्रेनिया, ओसीडी जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ी हैं। खासतौर पर कोविड की दूसरी लहर के बाद समाज के एक बड़े वर्ग में ऐसी मानसिक समस्याएं देखी जा रही हैं। इनमें कई मामलों में आखिर में पीड़ित को लगता है कि उसके जीने का कोई मकसद नहीं है और वह आत्महत्या का रास्ता चुन लेता है। जम्मू कश्मीर में विभिन्न तरह से नशे में लिप्त लोगों में भी डिप्रेशन बढ़ा है। साइकाइटरी अस्पाल में कार्यरत डॉ. राकेश बनाल ने बताया कि अस्पताल में रोजाना औसतन 150 से 200 के बीच मरीज आ रहे हैं, जिनमें आधे नए मरीज हैं। इनमें अधिकतर डिप्रेशन संबंधी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।
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बच्चों में बढ़ा तनाव
डिप्रेशन और तनाव से बच्चे भी अछूते नहीं रहे हैं। पिछले दो साल से वैश्विक स्तर पर कोविड महामारी के चलते जम्मू-कश्मीर के बच्चों के मानसिकता व्यवहार और सोच में बदलाव आया है। स्कूल बंद रहने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। ऑनलाइन कक्षाएं लगने से उन्हें पहले की तरह स्कूलों में न पहुंचकर दोस्तों के साथ खेलने-कूदने और पढ़ने का मौका नहीं मिला। घर पर रहने के कारण उनका अधिकतर समय स्मार्टफोन पर बीता है। ऑनलाइन पढ़ाई में मोबाइल पहली प्राथमिकता बनने के साथ बच्चों में इंटरनेट एडिक्शन बढ़ा है। इससे बच्चों में भी तनाव और डिप्रेशन बढ़ा है।
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जम्मू में पांच, श्रीनगर में 28 मनोचिकित्सक
साइकाइटरी अस्पताल जम्मू संकाय (फेकल्टी) के मामले में पीछे रहा है। अस्पताल में सृजित मनोचिकित्सकों के सात पदों में से पांच ही मनोचिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि एक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट तैनात है। श्रीनगर के साइकाइटरी अस्पताल में 28 मनोचिकित्सक कार्यरत हैं, इसके अलावा जिला स्तर पर भी मनोचिकित्सक कार्यरत हैं।
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लक्षण
खाना पीना बंद कर देना, नींद न आना, ना उम्मीद होना, अपने भविष्य के बारे में नकारात्मक सोच, किसी से कोई मदद की उम्मीद न करना, सभी चीजों में नकारात्मक देखना, शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर पड़ना, दोस्तों से संवाद खत्म करना, उदासी बढ़ना, अपनों से दूरी बनाए रखना
बचाव
किसी पीड़ित में डिप्रेशन के लक्षण मिलने पर परिवार के लोगों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। यह घरवालों के लिए चेतावनी के संकेत होते हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर तुरंत डाक्टर या मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। पीड़ित की काउंसिलिंग करें। उसके साथ पारिवारिक स्तर पर भावनात्मक समर्थन बढ़ाएं।