वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू के पहले बजट में रियासत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति सामने आ सकती है। गंभीर आर्थिक संकट से निपटना सबसे बड़ी चुनौती है। वित्त मंत्री नए टैक्स लगाने से तो बचना चाहेंगे, लेकिन, आंतरिक संसाधन विकसित करने के प्रयास बजट में शुमार हो सकते हैं।
पिछली सरकार ने नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन तो किया लेकिन बजट में सिर्फ पांच करोड़ का ही प्रावधान किया गया। बाद में दूसरे मद की राशि नई प्रशासनिक इकाइयों का ढांचा खड़ा करने पर खर्च की गई। इससे आर्थिक संतुलन गड़बड़ाया। नए बजट में नई प्रशासनिक इकाइयों के लिए राशि का बाकायदा प्रावधान किया जा सकता है।
डॉ. द्राबू रविवार को अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं। बजट में केंद्रीय प्रावधानों से सीधे जुड़कर मदद पाने की भी कोशिश हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया है। इससे रियासत को एक हजार करोड़ की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।