सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) 24 घंटे सतर्क और हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। सीमापार से जब भी घुसपैठ के प्रयास होंगे तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह बातें अतिरिक्त महानिदेशक, बीएसएफ (पश्चिमी कमान) पीवी रामशास्त्री ने श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र हुमहामा स्थित बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में पासिंग आउट परेड और सत्यापन समारोह में कहीं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति है बीएसएफ अपना काम अच्छे से कर रही है। चाहे घुसपैठ को रोकना हो, ड्रोन के खिलाफ कार्रवाई यह सुरंग विरोधी अभियान हो। जवान पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं। बीएसएफ सीमाओं की रक्षा करती है और घुसपैठ को रोकती है। प्रकार की घुसपैठ को रोकेंगे। इससे उग्रवाद से लड़ने वाली एजेंसियों के हाथ मजबूत होंगे।
जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र हुमहामा स्थित बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में रंगरूटों की पासिंग आउट परेड और सत्यापन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 119 रंगरूट बीएसएफ में शामिल होने के लिए पास आउट हुए। अतिरिक्त महानिदेशक, बीएसएफ (पश्चिमी कमान) पीवी रामशास्त्री इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। इसके अलावा उनके साथ आईजी बीएसएफ कश्मीर फ्रंटियर अशोक यादव भी मौजूद रहे। मुख्य अतिथि ने बीएसएफ भर्ती कांस्टेबल की परेड का निरीक्षण किया।
रंगरूटों को संबोधित करते हुए एडीजी बीएसएफ ने परेड का मुख्य आकर्षण जवानों का आत्म-विश्वास और कौशल की प्रशंसा की। उन्होंने बीएसएफ को करियर विकल्प के रूप में चुनने के लिए रंगरूटों की सराहना की और उन्हें साहस और उत्साह के साथ देश की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। एडीजी बीएसएफ ने अपने संबोधन में युवाओं को एक फौजी की शकल में ढालने के सफल प्रयासों के लिए ट्रेनिंग टीमों को बधाई दी, क्योंकि अच्छी तरह से प्रशिक्षित कर एक जवान को सीमा प्रहरी में बदलना और उन्हें आत्मविश्वास देना एक बड़ा कार्य हैं। उन्होंने रंगरूटों को उनके जीवन और नौकरी में उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद भी दिया।
पी वी रामशास्त्री ने कहा, "पासिंग आउट परेड एक रिक्रूट के लिए बहुत अच्छा समय है, मुझे खुशी है कि मैं इस समारोह में शामिल हुआ, बीएसएफ अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए जाना जाता है।"
सीमा सुरक्षाबल के वरिष्ठ अधिकारी, अन्य सहयोगी एजेंसियां के अधिकारी, जवानों के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य ने इस यादगार परेड को देखा और उन्हें गर्व महसूस हुआ, जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे।
गौरतलब है कि 44 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के दौरान, रंगरूटों ने धीरे-धीरे विभिन्न प्रकार के हथियारों को संभालने, फायरिंग कौशल, ड्रिल, आदि को सीखा। इसके अलावा एसटीसी बीएसएफ कश्मीर के प्रशिक्षकों की कड़ी मेहनत से उनकी शारीरिक क्षमता में भी इजाफा हुआ। जिसके परिणामस्वरूप वे अब शांति और युद्ध के दौरान देश की सेवा करने के लिए शारीरिक, मानसिक और पेशेवर रूप से तैयार हैं।
वहीं बीएसएफ में शामिल हुए जवानों का कहना था कि उन्हें गर्व है कि अब वो देश की सर्वश्रेष्ठ सेना का हिस्सा हैं और हमने आज अपने देश को सुरक्षित रखने की शपथ ली है। इसके लिए हम अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हैं, न केवल हमने बल्कि हमारे परिवारों के लिए भी आज गौरवपूर्ण समय है। यह हमारे सपने के सच होने जैसा है।