ओजीडब्ल्यू आतंकवादियों की कर रहे मदद
चार सितंबर को रियासी जिले के चसाना इलाके में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया, जबकि एक अन्य आतंकवादी भागने में सफल रहा। अधिकारी ने कहा कि कुछ ओजीडब्ल्यू हैं जो सीमा गाइड के रूप में काम कर रहे हैं और अपने पाकिस्तान स्थित आकाओं के संपर्क में रहने के लिए विभिन्न मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहे हैं। वह आतंकवादियों को रसद सहायता प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'आतंकवादी रियासी के अंदरूनी इलाकों में अपनी गतिविधियां फिर से शुरू करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, जिन्हें सफल नहीं होने दिया जाएगा। एसआईए पहले से ही पिछले साल गिरफ्तार किए गए दो आतंकवादियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामले की जांच कर रही है। एजेंसी ने अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया और एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में छापेमारी की।
रियासी के सुदूर इलाके में बीते साल जुलाई माह में राजोरी का रहने वाला आतंकी तालिब हुसैन शाह और पुलवामा का रहने वाल उसका सहयोगी फैसल अहमद डार को ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। गिरफ्तारी के समय आतंकियों के पास से दो एके असॉल्ट राइफलें, एक पिस्तौल, सात ग्रेनेड और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया। इस मामले को पहले रियासी के माहौर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया, जिसे बाद में एसआईए जम्मू को स्थानांतरित कर दिया गया। एजेंसी ने पिछले साल दिसंबर में तालिब हुसैन समेत लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के चार आतंकवादियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।
अपने आरोप पत्र में एसआईए ने कहा कि जांच से पता चला है कि आतंकी मोहम्मद कासिम और जिया-उल-रहमान पहले पाकिस्तान भाग गए हैं। तालिब हुसैन और उसके सहयोगियों सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से आने वाली हथियार और विस्फोटक सामग्री की तस्करी करते थे। जांच से यह भी पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आकाओं के निर्देश पर तालिब हुसैन ने जम्मू संभाग के चिनाब घाटी और पीर पंजाल इलाकों में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के लिए कई स्थानीय युवाओं की भर्ती की थी।