फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रीन जम्मू-कश्मीर ड्राइव-2021: उप-राज्यपाल ने मेगा पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया, दिया ये संदेश

Fri, 30 Jul 2021 04:50 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि वायु प्रदूषण, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए आज हम जो भी उपाय कर रहे हैं, मुझे विश्वास है कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा, चाहे वह गांवों में हो या शहरों में। 
विज्ञापन
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : @manojsinha_
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जम्मू से 'ग्रीन जम्मू-कश्मीर ड्राइव-2021' का शुभारंभ किया। इस अभियान के तहत प्रदेश में 1.30 करोड़ पौधे लगाए जाने हैं। उप-राज्यपाल ने इस मेगा पौधरोपण अभियान के शुभारंभ को चिह्नित करने के लिए आईआईटी परिसर में एक 'कप्रेसस' का पौधा लगाया।

विज्ञापन


इस अवसर पर उप-राज्यपाल ने कहा कि 'ग्रीन जम्मू-कश्मीर ड्राइव' का उद्देश्य सभी हितधारकों, विशेष रूप से ग्राम पंचायतों, महिलाओं, छात्रों, शहरी स्थानीय निकायों, संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों और की भागीदारी के साथ बड़े पैमाने पर जन आंदोलन बनाना है।

हमारा उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के दो-तिहाई भौगोलिक क्षेत्र को जंगल और वृक्षों से आच्छादित करना है। जम्मू और कश्मीर संभाग में वन और वृक्षों का आवरण लगभग 55 फीसदी है। जोकि राष्ट्रीय औसत 24.56 प्रतिशत से अधिक है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि वर्तमान परिस्थितियां जहां कई जगहों पर लोगों के लिए कठिन चुनौती पेश कर रही हैं, वहीं सरकारी तंत्र और जम्मू-कश्मीर के लोग हमारी प्राकृतिक संपदा को संरक्षित और मजबूत करके आने वाली पीढ़ी के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।
विज्ञापन


उप-राज्यपाल ने विज्ञान और पारिस्थितिकी को एक साथ विकास के पथ पर ले जाने के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि हमारे पर्यावरण के विकास और संरक्षण के बीच संतुलन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। मुझे खुशी है कि जम्मू-कश्मीर में जनभागीदारी की भावना से ग्रीन इंडिया मिशन लागू किया जा रहा है। जिससे 320 गांवों में वनों की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार के अलावा आर्थिक लाभ भी होगा।

सिन्हा ने कहा कि वैज्ञानिक बताते हैं कि विनाशकारी जलवायु परिवर्तन को रोकने और जैव विविधता के नुकसान को कम करने में यह दशक सबसे ज्यादा मायने रखता है। यदि हम अगले दस वर्षों में अपनी पारिस्थितिकी को बहाल करने में विफल रहते हैं, तो आने वाले समय में कम से कम दस लाख प्रजातियां विलुप्त हो सकती हैं।

उप-राज्यपाल ने आईआईटी फैकल्टी को परिसर के कचरे को ऊर्जा में बदलने के लिए बायो-डाइजेस्टर स्थापित करने की सलाह दी। इसके अलावा विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की तर्ज पर परिसर में जैव विविधता पार्क की स्थापना पर भी विचार किया जा सकता है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- किश्तवाड़ जल प्रलय: मौत के मुंह से निकले इमरान की आपबीती- हमारे बुजुर्गों ने भी कभी नहीं देखी ऐसी तबाही    
यह भी पढ़ें- जल-प्रलय: कुपवाड़ा में आई बाढ़ से एक पुल क्षतिग्रस्त, किश्तवाड़ में बारिश ने रोका रेस्क्यू ऑपरेशन    

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें