बारामुला से तो अलगाववादी नईम खान के भाई नजीर खान ने मुख्यधारा में शामिल होकर चुनाव लड़ा। बारामुला लोकसभा सीट पर लश्कर ए ताइबा के सक्रिय आतंकी उमर के भाई रउफ अहमद और टीआरएफ के कमांडर बिलाल के परिवार ने मतदान किया। उमर के भाई ने अपने भाई से मुख्यधारा में लौटने की अपील भी की थी। श्रीनगर सीट पर आने वाले जिले पुलवामा में जमात ए इस्लामी के अमीर गुलाम कादिर ने मतदान किया। उन्होंने दावा किया कि जमात से जुड़े ज्यादातर सदस्यों ने मतदान का इस्तेमाल किया है। यह उनका हक है।
कश्मीर की सभी लोकसभा सीटों पर इस बार न अलगाववाद का असर दिखा और न ही आतंकी धमकियों का। बहिष्कार का नारा लगाने वाले खुद मतदान केंद्रों तक पहुंचे। हर ओर लोकतंत्र का जश्न दिखा। किसी के भी चेहरे पर खौफ नहीं दिखा। पाकिस्तान पोषित अलगाववादियों ने भी खुद को मतदान से जोड़ा। सभी चरणों में मतदान करने के लिए लोगों में जबर्दस्त उत्साह देखा गया। जानकारों का कहना है कि कश्मीर में मतदान ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। श्रीनगर, बारामुला और अनंतनाग में मतदान का प्रतिशत बढ़ना यह दर्शाता है कि घाटी के माहौल में बदलाव आया है। अब लोगों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति भागीदारी बढ़ी है।
मतदान बढ़ना लोकतंत्र के लिए सुखद
घाटी की तीन सीटों पर 50.86 फीसदी मत पड़े हैं। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए सुखद है। चुनाव में सभी वर्ग ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की। कश्मीर की तीनों सीटों पर रिकॉर्ड मतदान यह दर्शाता है कि लोगों की लोकतंत्र में आस्था बढ़ी है। - पीके पोले, मुख्य निर्वाचन अधिकारी।