रियासत में नव निर्वाचित विधायकों को एक माह बाद भी सियासी धुंध छंटने का इंतजार है। दरअसल बिना विकास निधि के जन समस्याओं का निपटारा करने में विधायकों को दिक्कतें आ रही हैं। एक महीना वेट एंड वाच में गुजर गया है।
अब आगे कितना और समय लगेगा, इस बारे में फिलहाल कयासों के अलावा कुछ भी स्टीक कहना माननीयों के बस में भी नहीं है। इन सबके बावजूद विधायकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द अधिकार मिलेंगे और स्थिर सरकार का गठन जम्मू-कश्मीर में हो जाएगा।
23 दिसंबर, 2014 को चुनाव के नतीजों में विजयी हुए उम्मीदवारों को विधायक बने 23 जनवरी शुक्रवार को एक महीना पूरा हो रहा है। इस बारे में ‘अमर उजाला’ ने कई विधायकों से बात कर उनके मन को टटोला और उनके माह के अनुभवों की जानकारी हासिल की।
रायपुर दोमाना से विधायक बाली भगत का कहना है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में औसतन रोजाना करीब पांच बिजली के ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। उनका प्रयास रहता है कि जले ट्रांसफार्मरों को संबंधित विभाग के अधिकारियों को कहकर जल्द बदला जाए।
बहरहाल अगर विकास निधि कोष हो तो कई ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करवाने में मदद मिलेगी। विकास के काम भी विकास निधि से और तेजी से हो सकते हैं। बहरहाल पूरी उम्मीद है कि जल्द ही सियासी धुंध छंटेगी और स्थिर सरकार रियासत में होगी।