उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में औद्योगिक क्षेत्र और ताप विद्युत उत्पादन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इस सीमावर्ती जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 17 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट और उच्च गुणवत्ता वाले संगमरमर के भंडार मौजूद हैं।
भूविज्ञान और खनन (जीएंडएम) विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 9 लाख मीट्रिक टन लिग्नाइट जिले के निकहामा और हैंगनिककोट क्षेत्रों में उपलब्ध हैं। इससे तापीय बिजली उत्पादन की बड़ी संभावना है।
इसी तरह अवूरा और जिरहामा में 8 लाख मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले संगमरमर के भंडार हैं जो औद्योगिक क्षेत्र को पुनर्जीवित कर सकते हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे पहले रियासी जिले में पिछले सप्ताह लिथियम धातु के भंडार का पता चला था।
भूविज्ञान और खनन (जीएंडएम) विभाग के अनुसार लिग्नाइट की उपलब्धता से ताप विद्युत के उत्पादन की क्षमताएं काफी बढ़ जाती हैं। इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा। साथ ही भवन निमार्ण के लिए संगमरमर भी आसानी से उपलब्ध होगा। देश में लिग्नाइट की 90 फीसदी आपूर्ति तमिलनाडु की नेवेली लिग्नाइट परियोजना से होती है।
क्या होता है लिग्नाइट
लिग्नाइट निम्न श्रेणी का कोयला होता है। इसका रंग कत्थई या काला-भूरा होता है तथा आपेक्षिक घनत्व भी पत्थर कोयला से कम होता है। इसमें नमी काफी होती है। इसका उपयोग ताप विदु्यत उत्पादन के लिए किया जाता है।
देश में पहली बार लिथियम के भंडार मिले
इसी माह दस फरवरी को देश में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में लिथियम के भंडार मिले। देश में लीथियम भंडार की यह पहली साइट है, जिसकी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने शिनाख्त की है।