झज्जर कोटली हादसे में मारे गए मजदूरों के साथ भी नियति ने अजब खेल खेला। घाटी में गैर प्रांतीय श्रमिकों को आतंकियाें द्वारा निशाना बनाए जाने से दहशत के चलते आठ मजदूर आनन फानन घर के लिए निकले लेकिन जम्मू पहुंचने से पहले ही मौत ने उनकी सांसें भी रोक दीं।
जानकारी के अनुसार बिहार के रहने वाले मजदूर श्रीनगर में दिहाड़ी लगाकर अपनी रोजी रोटी कमा रहे थे। लेकिन कुलगाम में आतंकियों द्वारा छह मजदूरों की हत्या कर देने के बाद श्रीनगर में काम करने वाले मजदूरों में दहशत हावी हो गई।
वह कश्मीर छोड़कर अपने घरों को जा रहे हैं। हादसे में जान गवाने वाले यह मजदूर भी डरकर अपनी जान बचाते हुए अपने घरों को लौट रहे थे। लेकिन मौत ने इनका पीछा नहीं छोड़ा और सड़क हादसे में जान चली गई। मृतक तीनों मजदूरों के शव जीएमसी के शवगृह रखे गए हैं। अभी इनका पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ। क्योंकि इनके परिजनों के आने तक पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता। पुलिस ने उन मजदूरों के घर पर संदेश दे दिया है, जिनकी पहचान हो पाई है या फिर जो थोड़ी बहुत बात कर सकते हैं।