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Jammu Kashmir: जम्मू हाईकोर्ट ने पुलिस जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल, काउंटर एफआईआर की जांच दोबारा शुरू

Wed, 01 Jan 2025 12:41 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू हाईकोर्ट ने काउंटर एफआईआर मामलों की पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए उन्हें दोबारा जांचने और एक मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काउंटर एफआईआर मामलों में पुलिस की जांच रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। जानीपुर पुलिस थाने में प्रोबेशनर जज अजय सरीन की शिकायत पर पक्का डंगा निवासी रोहित पर मारपीट का मामला दर्ज है। पक्का डंगा पुलिस स्टेशन में रोहित किशन भट्ट की पत्नी रागिनी राजपूत की शिकायत पर प्रोबेशनर जज अजय सरीन के खिलाफ प्रताड़ित करने और मारपीट का मामला दर्ज है।

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दोनों मामलों पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राहुल भारती ने पुलिस की जांच को घटिया और समझौतापूर्ण बताया। दोनों मामलों की जांच नए सिरे से करने का आदेश दिया।पक्का डंगा थाने में दर्ज मामले की जांच दोबारा दो महीनों के भीतर करने और जानीपुर मामले की जांच सीबीआई को सौंप 90 दिनों के भीतर करने को कहा। जानीपुर पुलिस को मामले का रिकार्ड सीबीआई को सौंपने के लिए कहा गया है।

न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आपराधिक मामले में जांच का मतलब एफआईआर की स्क्रिप्ट के अनुसार खुद को ढालना नहीं है। पुलिस की रिपोर्ट आरोपों, प्रति-आरोपों और समझौतापूर्ण पुलिस कार्य के उलझे हुए जाल के संदर्भ में है।

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ये है मामला
एक मामले में प्रोबेशनरी पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और सिविल जज अजय कुमार सरीन ने रोहित कृष्ण भट पर हमला करने का आरोप लगाया और इसके विपरीत भट्ट की पत्नी रागिनी राजपूत द्वारा सरीन के खिलाफ उत्पीड़न, पीछा करने और हमला करने के आरोप लगाए।। 23 जनवरी, 2024 को दर्ज की गई पहली एफआईआर में रोहित भट्ट पर सरीन पर लोहे की वस्तु से हमला करने का आरोप लगाया गया, जिससे उन्हें चोटें आईं।

कुछ दिनों बाद राजपूत द्वारा एक जवाबी एफआईआर दर्ज की गई। इसमें सरीन पर लगातार उत्पीड़न और हमले का आरोप लगाया गया। मामलों में पुलिस जांच में स्पष्ट खामियां सामने आईं। मामलों की जांच कानूनी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का उदाहरणअदालत ने कहा कि वर्तमान मामले कानूनी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग के उदाहरण हैं। जिसमें मुख्य पात्र मनगढ़ंत कहानियों का सहारा ले रहे हैं।

वर्तमान मामले तथ्यों के साथ छेड़छाड़ और बेधड़क मनगढ़ंत कहानियों का सहारा लेकर कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग का जीवंत उदाहरण हैं। ये पुलिस स्टेशन जानीपुर जम्मू द्वारा जांच दृष्टिकोण के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये से प्रेरित है। जो इस तरह से कार्य कर रहा है। दोनों पक्षों की विश्वसनीयता को कमजोर किया।
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