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शहीद जवान के पिता को रोता देख भावुक हुआ अफसर, गले लगाकर कह दी ये बात

Thu, 29 Nov 2018 01:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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indian army - फोटो : Twitter
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जम्मू-कश्मीर में शोपियां जिले में सोमवार को मुठभेड़ में शहीद हुए लांसनायक नजीर अहमद वानी के सुपुर्द-ए-खाक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। इस तस्वीर को इंडियन आर्मी के ऑफिसियल अकाउंट से ट्वीट किया गया था। जिसके बाद से यह तस्वीर वायरल हो गयी है। ऑपरेशन ऑल आउट के तहत इस मुठभेड़ में 6 आतंकवादी मारे गए थे। इस खबर के बाद से ही उनके घर में कोहराम मचा हुआ था। शहीद जवान घाटी के कुलगाम का ही रहने वाला था। 

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इस दौरान उनके बुजुर्ग पिता के आंसू नहीं रुके तो सेना के एक अधिकारी ने उन्हें सांत्वना दी। जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। काफी साल पहले वह आतंकवाद की राह पर था जहां से उसने आत्मसमर्पण पर दिया था। इसके बाद वह टेरीटोरियल आर्मी में भर्ती हो गया था। आज हर किसी को उस पर गर्व है। सेना के अधिकारियों ने कहा है कि शहीद नजीर अहमद वानी का बलिदान बेकार नहीं जाएगा।



शहीद नजीर अहमद वानी कुलगाम के चक अशमुजी गांव के रहने वाले थे। देश के लिए बलिदान देने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को पूरे गांव ने अश्रुपूर्ण विदाई देकर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया। सेना और आतंकियों के बीच हुए मुठभेड़ में वह शहीद हो गए थे। सैनिक का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेट कर कुलगाम में उनके पैतृक गांव चक अशमुजी लाया गया और उनके परिजनों को सौंप दिया गया।

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पार्थिव शरीर के साथ आए सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि वानी शुरुआत में आतंकवाद के रास्ते पर थे, लेकिन बाद में हिंसा की निरर्थकता महसूस करने के बाद वे सेना में शामिल हो गए थे। सामान्यतौर पर लोगों यही मानना है कि आतंक का अपना कोई ईमान नहीं होता, लेकिन शहीद लांस नायक नाजिर अहमद वानी उनमें से नहीं थे। उन्होंने आतंक की राह छोड़ खुद को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

तीन बार सेना ने किया था सम्मानित                                                                                                                                                   
लांसनायक वानी एक बेहतरीन सिपाही थे और वर्ष 2007 में उनकी वीरता के लिए उन्हें सेना मेडल दिया गया था। जिसके बाद उन्हें दो बार अगस्त 2017 और 2018 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। वानी के घर में पत्नी और दो बच्चे हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में टेरिटोरियल आर्मी से की थी। उन्हें बुधवार को सुपुर्द-ए खाक करते समय 21 तोपों की सलामी दी गई। इस मौके पर सैकड़ों लोग मौजूद थे। उनका गांव आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात है, लेकिन जैसे ही वानी की मौत की खबर लगी गांव में मातम छा गया। 

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