क्लासिफिकेशन में इन गोपनीय फाइलों की छंटनी की जा रही है। इसके बाद अन्य दस्तावेजों को सर्वर में अपलोड किया जाएगा। इसके बाद 1985 से आगे के दस्तावेजों को डिजिटलीकरण किया जाएगा। ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी ऑनलाइन मिलने से रिसर्च स्कालर और इतिहासकार इस क्लिक पर डाटा को एक्सेस कर पाएंगे। इन दस्तावेजों को फेज वाइज डिजिटल फार्मेट में तबदील किया गया था। दस्तावेजों के क्लासिफिकेशन में छह माह का समय लेगा।
हमने 70 लाख के करीब दस्तावेजों को डिजिटल फॉर्मेट में तबदील किया है। इन दस्तावेज में कई गोपनीय फाइलें है जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। डाटा का क्लासिफिकेशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में छह माह के करीब का समय लेगा। इसके बाद डाटा को सर्वर के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।
- तरसेंग ताशी, डिप्टी निदेशक पुरातत्व, संग्रहालय विभाग, जम्मू
कई गोपनीय फाइलें है
विभाग द्वारा किए फाइलों के डिजिटलीकरण में कई फाइलें गोपनीय हैं। 1742 से 1985 तक के दस्तावेजों में डोगरा शासकों द्वारा भारत सरकार व पाकिस्तान के साथ किए करार हैं। फाइलों के डिजिटलीकरण के दौरान सभी फाइलों को डिजिटल फॉर्मेट में बदला गया था, अब इन फाइलों की छंटनी की जा रही।
इन फाइलों में राज्य के इतिहास, भूगोल के साथ राजनीतिक, आर्थिक, गृह, रक्षा, कृषि, आर्थिक, कानून, बिजली विभाग के रिकॉर्ड हैं। फाइलों में 1985 तक की लोक संस्कृति और चित्रकारों के संबंध में भी जानकारी है।
अब क्लासिफिकेशन के हिसाब से होगा डिजिटलीकरण
डिजिटलीकरण के लिए बचे 30 प्रतिशत दस्तावेज को अब क्लासिफिकेशन के हिसाब से डिजिटल फॉर्मेट में बदला जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि गोपनीय फाइलों की जानकारी को ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जाएगा। बिक्रम चौक में इसमें 28 सौ बसता और 42 हजार फाइलें हैं जिनका डिजिटलीकरण होना है।