प्रदेश में भ्रष्टाचार समेत अन्य आपराधिक मामलों की सैकड़ों एफआईआर के चालान कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। वर्षों से मामलों की जांच लंबित पड़ी है। ज्यादातर मामले सरकारी अफसरों और कर्मियों के हैं। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को फटकार लगाई है। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव, जीएडी के सचिव, डीजीपी पुलिस और सतर्कता आयोग को नोटिस जारी कर जांच लंबित होने पर जवाब मांगा है।
दरअसल, मुख्य न्यायाधीश ने सभी जिला जजों से अपने-अपने यहां लंबित मामलों की रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट मिलने पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताई। बुधवार को जस्टिस रजनीश ओसवाल और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया।
रिपोर्ट में बताया गया कि 1998 से अब तक भ्रष्टाचार के 229 मामलों की जांच लंबित है। यह मामले सरकारी अफसरों और कर्मियों के हैं, जो सिर्फ जम्मू एंटी करप्शन कोर्ट में चल रहे हैं। मामलों के अब तक चालान पेश नहीं हुए, जबकि इतने वर्षों में अफसरों और कर्मियों ने जांच न होने की वजह से प्रमोशन और अन्य लाभ भी ले लिए।
हाईकोर्ट ने यह पाया कि आरपीसी के तहत कई मामले ऐसे भी हैं, जिनके चालान 2011 से लंबित हैं। यह मामले एनडीपीएस के हैं। बहुत से ऐसे मामले हैं, जिनमें अपराध बेहद संगीन है लेकिन चालान पेश नहीं हुआ। दशकोें से कोर्ट इन मामलों में न्याय नहीं हो पा रहा है।
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