जम्मू-कश्मीर में उप राज्यपाल की ओर से पांच विधायक नामित करने के मामले से संबंधित जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।न्यायाधीश संजीव कुमार एवं राजेश सेखरी की अध्यक्षता वाली विशेष खंडपीठ ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किया है। आगामी पांच दिसंबर को यह मामला बहस के लिए सूचीबद्ध किया है।
हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि इस तथ्य को देखते हुए कि सरकार का गठन हो चुका है, अंतरिम राहत प्रदान करने की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं। इस स्तर पर अंतरिम राहत के लिए याचिकाकर्ताओं की प्रार्थना को अस्वीकार किया जाता है। यदि परिस्थितियों में कोई बदलाव होता है, तो पक्षकार अंतरिम राहत के लिए इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे।
इसके पहले याचिकाकर्ता रविंदर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने सहयोगी अधिवक्ता डीके खजूरिया, मुहम्मद अली खान, उमर होदा, उदय भाटिया, अर्जुन शर्मा, ईशा बख्शी, कामरान खान, गुरबानी भाटिया और आयुष पंजोत्रा ने दलीलें दीं।
प्रतिवादियों की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व डीएसजीआई विशाल शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व सीनियर एएजी मोहसिन कादरी, सहायक वकील महा मजीद और सीनियर एएजी राशिद मलिक, मोहम्मद यूनुस हाफिज ने दलीलें दी। दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि यह मामला बहस योग्य है। क्या जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 15, 15-ए और 15-बी, विधानसभा के सदस्यों को नामित करने का प्रावधान करती है? विधानसभा की स्वीकृत संख्या से अधिक तथा अल्पमत सरकार को बहुमत सरकार में बदलने की क्षमता रखने वाले क्या संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करते हुए संविधान के दायरे से बाहर हैं? इस पर बहस होनी चाहिए।