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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को तीन बंदियों के खिलाफ जन सुरक्षा अधिनियम के तहत नजरबंदी के आदेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही किसी अन्य मामले में जरूरत न होने पर उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने तीन अलग-अलग याचिकाओं को स्वीकार करते हुए शुक्रवार को कुजर यारीपोरा कुलगाम के जाफर रशीद डार, यारू लंगटे कुपवाड़ा के वहीद अहमद खांडे और गगरेन शोपियां के सालिक परवेज भट के खिलाफ नजरबंदी के आदेश को रद्द कर दिया।
जाफर पर 30 अक्टूबर 2021 को पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया था और उन्होंने उसी साल नजरबंदी को चुनौती दी थी। खांडे पर 19 अक्टूबर 2021 को पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया था और उन्होंने भी उसी साल इसे चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी जबकि सालिक को पिछले साल 28 जनवरी को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया था और उन्होंने पिछले साल इसके खिलाफ याचिका भी दायर की थी।
अदालत ने उनमें से एक जाफर की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा, इस पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है कि (बंदी) से एक प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इसी तरह के आदेश दो अन्य बंदियों के संबंध में पारित किए गए।