सरकारी शिक्षकों को सरकार से मोटी तनख्वाह मिलती है। बेहतर शिक्षण का प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे शिक्षकों का निजी ट्यूशन में शामिल होना गैर जरूरी और नियमों के विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने एक याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि कर्मचारी आचरण नियम के नियम 10 को सरकार अमल में लाए। सरकार यदि मंजूरी देती है तो ही शिक्षक निजी ट्यूशन कर सकते हैं। निजी ट्यूशन पर सख्ती से रोक के लिए जोनल शिक्षा अधिकारी जोन और मुख्य शिक्षा अधिकारी जिला स्तर पर नोडल अफसर होंगे।
जिला स्तर पर टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर और वेबपोर्टल स्थापित किए जाएं, जहां शिक्षकों समेत सरकारी कर्मचारियाें की प्रतिबंधित गतिविधियों की सूचनाएं अथवा शिकायत की जा सके। जस्टिस संजीव कुमार ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे कर्मचारी आचरण नियम का नियम 10 सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। क्योंकि यह हकीकत में लागू हुआ नजर नहीं आ रहा। सरकार ने दो बार इसे लेकर प्रयास किया। लेकिन विभाग के शिक्षक समुदाय ने कुछ विद्यार्थियों के अभिभावकों को आगे कर मामले को पेचीदा कर दिया।
कारोबार की बजाय रोल मॉडल की भूमिका पर ध्यान दें
जस्टिस संजीव कुमार ने पाया कि सरकार की अच्छी खासी तनख्वाह लेने के बाद भी शिक्षक निजी ट्यूशन की ओर ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ता है। कई शिक्षकों ने घर पर ट्यूशन सेंटर चला रहे हैं तो कई कोचिंग सेंटरों में जाकर पढ़ाते हैं। सरकारी शिक्षा का स्तर गिरने के पीछे यह एक बड़ी वजह है।
समाज के लिए शिक्षक एक रोल मॉडल है, जो बच्चों के करियर और चरित्र का निर्माण करता है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे पूरी तरह से सरकारी शिक्षा तंत्र पर निर्भर होते हैं। उनके हितों से खिलवाड़ नहीं होने दिया जा सकता। ऐसे शिक्षकाें को कारोबार की बजाय रोल मॉडल की भूमिका पर ध्यान देना चाहिए। जेएनएफ
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: हर साल होगी शराब ठेकों की नीलामी, डोमिसाइल धारक ही कर सकेगा आवेदन
इस याचिका पर आया आदेश
दसवीं और बारहवीं में पढ़े रहे दो छात्रों के पिता ने याचिका दायर कर किश्तवाड़ के मुख्य शिक्षा अधिकारी के सर्कुलर को चुनौती दी थी। इसमें कहा गया था कि सीईओ ने 21 नवंबर 2020 को तमाम डीडीओ और कंट्रोलिंग अफसरों से कहा था कि वे सुनिश्चित करें कि शिक्षक, मास्टर, लेक्चरर निजी ट्यूशन में शामिल न हों। इस सर्कुलर से उनके बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है। यह सर्कुलर राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजूकेशन एक्ट, 2009 की धारा 28 के तहत जारी किया गया। यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट के लागू होते ही प्रदेश में लागू हो गया था।