राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पुलिस स्मरण दिवस पर सशस्त्र पुलिस परिसर श्रीनगर में रविवार को राज्य पुलिस बल और अर्ध सैन्य बलों के शहीद उन पुलिस कार्मिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1 सितंबर 2017 से 31 अगस्त 2018 के बीच शहीदत पाई। इन शहीदों में रियासती पुलिस के भी 46 जवान शामिल हैं। इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले इन जवानों को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने रियासत के संवेदनशील सुरक्षा परिदृश्य से निपटने में रियासती पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और सेना के बीच तालमेल की सराहना की।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने शहीदों के परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की और कहा कि शहीद पुलिस कर्मियों के परिवारों तक सभी कल्याणकारी योजनाएं आसानी से पहुंचे यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस दौरान राज्यपाल ने पुलिस के मुद्दों को हल करने के लिए उठाए गए हालिया फैसलों की जानकारी भी दी। बताया गया कि गैर-राजपत्रित कैडर में विभिन्न स्तरों पर ठहराव को संबोधित करने के लिए पुलिस विभाग में 8,531 गैर-राजपत्रित पद सृजित किए गए। पदोन्नति की पहल की गई।
पुलिस शहीदों को राहत राहत में 48 लाख से 70 लाख और शहीद एसपीओ के लिए 14.50 लाख की राशि को बढ़ाकर 30 लाख किया गया। 12वीं कक्षा तक राज्य के निजी स्कूलों में पुलिस के शहीद कर्मियों के दो बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान किया गया है। राज्यपाल ने हाल ही में राज्य में आयोजित शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मतदान के शांतिपूर्ण और घटना मुक्त आचरण के लिए राज्य पुलिस की प्रशंसा व्यक्त की।
डीजीपी दिलबग सिंह ने दिल्ली में राष्ट्रीय पुलिस मेमोरियल के उद्घाटन के लिए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया और पूरे देश भर में एक साल में शहीद हुए पुलिस, सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवानों के नाम पढ़े। श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राज्यपाल के सलाहकार बीबी व्यास, विजय कुमार और खुर्शीद ए गनई, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, सेवानिवृत्त डीजीपी, राज्यपाल के प्रधान सचिव, उमंग नरुला, प्रधान सचिव गृह राज कुमार गोयल, वित्तीय आयुक्त (राजस्व) डॉ पवन कोतवाल, एडीजीपी सशस्त्र एके चौधरी, निदेशक सतर्कता जे एम गिलानी, एडीजीपी अब्दुल गनी, अन्य वरिष्ठ नागरिक और पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे।