विजयपुर में इस तरह चल रहा स्कूल
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चार साल पहले तक स्कूल का अपना भवन था, आज मास्टर जी के लिए टेंट है और खुले आसमान में लगने वाली कक्षाओं में बैठने के लिए बच्चे घर से बोरी लेकर आते हैं। सांबा में विजयपुर के पास निर्माणाधीन एम्स अस्पताल परियोजना के दायरे में गवर्नमेंट मिडिल स्कूल अब्दुल्ला बस्ती की इमारत आ गई। बच्चों से स्कूल इमारत छिन गई और चार साल बाद भी इमारत नहीं बन पाई। मिडिल स्कूल में 120 बच्चे पढ़ते हैं। बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं।
चार साल पहले स्कूल की इमारत एम्स के निर्माण कार्य की भेंट चढ़ी
सांबा के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल अब्दुल्ला बस्ती में चार साल पहले स्कूल की इमारत एम्स के निर्माण कार्य की भेंट चढ़ी थी। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल को मिडिल स्कूल गढ़वाल में शिफ्ट किया। घर से नए स्कूल की दूरी ज्यादा होने से बच्चे उस स्कूल में नहीं गए। इसके बाद विभाग ने खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया।
इस स्कूल में बच्चों की संख्या 120 है, लेकिन भवन नहीं
स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया गया कि स्कूल के लिए भवन बनाया जाएगा। इसके लिए पैसा भी जारी हुआ है, लेकिन आश्वासन मिलने के चार साल बाद भी स्कूल अपनी इमारत के इंतजार में है। बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। प्रदेश में 50 से 60 विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों के पास भी अपनी इमारत है, जबकि इस स्कूल में बच्चों की संख्या 120 है, लेकिन भवन नहीं।
अब्दुल्ला बस्ती में नए स्कूल की इमारत मंजूर
अब्दुल्ला बस्ती में नए स्कूल के लिए इमारत को मंजूरी मिली थी। इसके लिए चार कनाल भूमि भी चिह्नित है। इसके बावजूद स्कूल की इमारत नहीं बनी। एम्स की इमारत बनने से शिफ्ट हुए स्कूल का सारा सामान शिफ्ट किया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू का कहना है कि मिडिल स्कूल की इमारत के लिए पैसा जिला प्रशासन मुहैया कराता है। इसके लिए संबंधित उपायुक्त और मुख्य शिक्षा अधिकारी ही कुछ कर सकते हैं।
बारिश में स्कूल हो जाता है बंद
खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगती हैं, स्कूल में बैठने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चे बैठने के लिए घर से खाली बोरी लाते हैं। जिस दिन मौसम खराब हुआ या बारिश हुई तो स्कूल बंद हो जाता है। सरकार की अनदेखी के चलते 120 बच्चों का भविष्य अंधकार में है। स्थानीय लोगों का कहना कि स्कूल में सभी बच्चे अनुसूचित जनजाति समुदाय के हैं। सरकार की अनदेखी से बच्चों का भविष्य अंधकार में है।
स्कूल को किसी दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने की योजना थी, लेकिन एम्स की ओर से अस्थायी रूप से बच्चों के बैठने का प्रबंध किया जा रहा है। अस्थायी ढांचे में बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के बैठने की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई पर असर न पडे़। - जसवंत सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी सांबा