बंद होने के कगार पर पहुंची स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी फिर जीवित होगी। राज्य प्रशासनिक परिषद ने इसके पुनर्गठन को मंजूरी दी है। लैब में जरूरी स्टाफ की नियुक्ति और ढांचे को आधुनिक मानदंडों पर विकसित किया जाएगा। वहीं, एसएसी ने जम्मू-कश्मीर के सभी 22 जिलों में मोबाइल फोरेंसिक यूनिट की सुविधा देने को भी मंजूरी दी है। एफएसएल से लाई डिटेक्ट विभाग को खत्म कर दिया गया है। इसमें 28 पद थे। 15 सहायक वैज्ञानिक अफसरों को प्रमोशन देकर वैज्ञानिक अफसर बनाने का फैसला भी किया गया।
श्रीनगर और जम्मू एफएसएल की चार डिवीजनों को मर्ज किया गया है। नारकोटिक्स, केमेस्ट्री और टाक्सीयोलॉजी डिवीजन को मर्ज कर इसका नाम नारकोटिक्स केमिकल डिवीजन रखा गया है। बायोलॉजी, सेरोलॉजी और डीएनए डिवीजन का नाम बायोलॉजी सेरोलॉजी डिवीजन, फिजिक्स और बैलेस्टिक डिवीजन को फिजिकल डिवीजन और साइबर एवं दस्तावेज डिवीजन को टेक्निकल डिवीजन नाम दिया गया है।
डीएनए डिवीजन बायोलॉजी और सेरोलॉजी डिवीजन का हिस्सा होंगे। जम्मू और श्रीनगर में दो एफएसएल हैं। हर साल इनमें 4100 मामले निपटारे के लिए आते हैं। इसमें नई तकनीक लाने से एफएसएल एक्सपर्ट को मदद मिलेगी। पुनर्गठन होने से एफएसएल के पास अब पर्याप्त मात्रा में स्टाफ होगा। एक्सपर्ट होंगे और इससे मामलों की जांच को रफ्तार मिलेगी। एफएसएल के मामलों की जांच के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी।
88 पदों को मंजूरी दी गई
एफएसएल में अलग अलग श्रेणी में 88 पदों को मंजूरी दी गई है। इनमें दो पद डिप्टी डायरेक्टर, 8 वैज्ञानिक अफसरों, प्रशासनिक अफसर, प्राइवेट सचिव, अकाउंट अफसर, सहायक अकाउंट अफसर, अकाउंट सहायक, हेड सहायक प्रत्येक का एक पद, दो पद सीनियर सहायक, 22 पर लैब तकनीशियनों के, 3 पद जूनियर सहायक, 4 पद लैब सहायक, 22 पद लैब अटेंडेंट, पांच पद अरदली के होंगे।