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जम्मू-कश्मीर: बीएसएफ पोस्ट के पास मिले पांच पुराने मोर्टार, आईईडी मिलने की अफवाह से हड़कंप

Sun, 22 Jan 2023 05:59 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

गणतंत्र दिवस व आतंकी घटनाओं को लेकर जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल अलर्ट हैं। जवान क्षेत्र में तलाशी करने के साथ विशेष नाके लगा कर जांच कर रहे हैं।
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LOC - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर स्थित सीमा सुरक्षाबल की अला माई दे कोठे पोस्ट के पास खोदाई के दौरान पांच मोर्टार शेल मिले हैं। इन्हें बीएसएफ ने कब्जे में ले लिया है। बीएसएफ का कहना है कि ये सभी पुराने शेल हैं। इन्हें बाद में सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया जाएगा।

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इन दिनों गणतंत्र दिवस व आतंकी घटनाओं को लेकर सुरक्षाबल काफी अलर्ट हैं। जवान क्षेत्र में तलाशी करने के साथ विशेष नाके लगा कर जांच कर रहे हैं,। उधर मीरां साहिब क्षेत्र में ब्रिगेड के आसपास शनिवार को आईईडी होने की सूचना मिलने पर हड़कंप मच गया था।

बाद में सुरक्षा एजेंसियों के जानकारी जुटाने के बाद पता चला कि यह अफवाह थी। एसडीपीओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि आरएस पुरा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। आम जनता से अपील है कि किसी प्रकार की संदिग्ध वस्तु मिलती है तो स्थानीय पुलिस थाने, चौकी आदि पर इसकी सूचना दें।  

एलओसी पर मिली बारूदी सुरंग सेना ने विस्फोट कर नष्ट किया

नियंत्रण रेखा पर सेना ने शनिवार दोपहर को नियंत्रण रेखा के करमाड़ा क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित मक्की क्षेत्र से एक पुरानी बारूदी सुरंग बरामद की। इसे बाद में सुरक्षित तरीके से विस्फोट कर नष्ट कर दिया गया। इससे क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली।

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क्षेत्र निवासियों का कहना है कि इस प्रकार की बारूदी सुरंग से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। शनिवार दोपहर को सेना की सरला बटालियन के जवानों ने नियंत्रण रेखा के करीब मक्की क्षेत्र में एकपुरानी बारूदी सुरंग देखी। इसके बारे में अधिकारियों को जानकारी दी।

दोपहर करीब 1 बजे सरला बटालियन के अधिकारियों की देखरेख में बम स्क्वायड ने उस बारूदी सुरंग को विस्फोट कर नष्ट कर दिया गया। गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ को रोकने के लिए बारूदी सुरंगे बिछाई जाती हैं।

पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई बार कुछ बारूदी सुरंगें बारिश अथवा भूस्खलन के कारण अपने स्थान से खिसक कर नीचे की तरफ पहुंच जाती है। इनके बारे में जानकारी न होने के कारण कभी-कभी कोई मवेशी अथवा मवेशी चराने वाले उनकी चपेट में आ जाते हैं।  

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