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जम्मू कश्मीर: पीओके से लगाई गई आग एलओसी पार कर भारतीय इलाके में पहुंची, बारूदी सुरंगों के फटने का खतरा

Wed, 04 Jan 2023 10:41 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ

सार

नियंत्रण रेखा के पार से भारतीय क्षेत्र तक पहुंची इस आग से शून्य रेखा के आगे बनाई गई बारूदी सुरंगों के फटने की सूचना मिल रही है। नियंत्रण रेखा पर तैनात सेना इस घटना के बाद चौकस हो गई है।
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पुंछ नियंत्रण रेखा पर लगी आग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पुंछ जिले में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित सलोत्री क्षेत्र में बुधवार देर शाम को पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र तेत्रीनोट से लगी आग तेजी से आगे बढ़ते हुए जीरो लाइन को पार कर जीरो लाइन के सलोत्री तक पहुंच गई। आग इतनी भीषण है कि उससे उठने वाली लपटें कई किलोमीटर दूर स्थित गांव खड़ी और दरादुलियां तक दिखाई दे रही है।

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नियंत्रण रेखा के पार से भारतीय क्षेत्र तक पहुंची इस आग में जीरो लाइन के आगे स्थित माइन फील्ड में बिछाई गई बारूदी सुरंगों के फटने की भी सूचना मिल रही है। नियंत्रण रेखा पर तैनात सेना भी इस आग के बाद चौकस हो गई है।

सूत्रों के अनुसार बुधवार देर शाम करीब साढ़े छह बजे पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के उस पार जंगल एवं घास में लगी आग तेजी से बढ़ते हुए भारतीय क्षेत्र तक पहुंच गई। जहां उस आग ने जंगल, घास और सरकंडों को अपनी चपेट में ले लिया।
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इससे बड़ी मात्रा में आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं, जो देर रात्रि समाचार लिखे जाने तक वैसे ही दिखाई दे रही थीं। सलोत्री गांव के कुछ लोगों ने बताया कि नियंत्रण रेखा के उस पार से इस पार पहुंची आग में रुक-रुक कर बारूदी सुरंगों में विस्फोट भी हो रहे हैं।

लोगों का यह भी कहना है कि इस आग में बड़ी संख्या में जंगली जानवरों के मारे जाने की भी आशंका है, क्योंकि नियंत्रण रेखा के आरपार के जंगलों में बड़ी संख्या में जानवरों की कई प्रजातियां विचरण करती हैं। उधर नियंत्रण रेखा के उस पार से लगी आग का भारतीय क्षेत्र तक पहुंच जाना चिंता का विषय है।

पूर्व की घटनाओं को देखा जाए तो उस पार पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र से आईएसआई और आतंकी संगठनों द्वारा जानबुझ कर नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के जंगलों में आग लगाई जाती है।

इसके पीछे उनकी मंशा नियंत्रण रेखा के इस पार सेना द्वारा दुश्मन की घुसपैठ रोकने के लिए बिछाई गई बारूदी सुरंगों को नुकसान पहुंचाकर आतंकियों के लिए घुसपैठ के लिए सुरक्षित रास्ता बनाना रहा है। हालांकि आईएसआई और आतंकी संगठनों की इस मंशा को सेना ने हमेशा ही नाकाम बनाया है।  

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