जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फिर पंख फैलाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सतर्क सुरक्षाबलों के चलते लगातार आतंकियों को मुंह की खानी पड़ रही है। औसतन हर दो दिन में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ देखने को मिल रही है। इन मुठभेड़ों में मारे जाने वाले ज्यादातर आतंकी विदेशी मूल (पाकिस्तानी) के हैं।
ऐसे आतंकी उत्तरी कश्मीर के जिलों में मारे जा रहे हैं। अभी तक 2024 में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच आठ मुठभेड़ हुई हैं। 15 आतंकवादियों को मार गिराया गया है। उत्तरी कश्मीर में सात विदेशी आतंकियों को मारा गया है।
सुरक्षाबल (फाइल)
- फोटो : एजेंसी
उड़ी सेक्टर में सोमवार सुबह सेना ने ऑपरेशन बजरंग को समाप्त करने की घोषणा कर दी। यह ऑपरेशन शनिवार को पांच आतंकियों की घुसपैठ करने की कोशिश को विफल बनाने के बाद शुरू किया गया था।
इस ऑपरेशन को सेना की 13 सिखलाई और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार दो घुसपैठियों को सेना ढेर करने में सफल रही है जबकि शव एक का ही मिला। दूसरा शव नियंत्रण रेखा से करीब पड़ा था।
सुरक्षा बल (फाइल)
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48 घंटों के बाद खत्म हुए इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को गोला-बारूद के साथ चीन निर्मित संचार उपकरण मिले हैं। अभी घाटी में विदेशी आतंकियों की संख्या स्थानीय आतंकवादियों से ज्यादा है।
आतंकी सुरक्षा रडार से बचने के लिए मोबाइल फोन की जगह चीन निर्मित वाईएसएमएस व रिवायती सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे ट्रेस करना संभव नहीं है। आतंकी अब स्थानीय गाइड का भी बहुत कम इस्तेमाल कर रहे हैं।