जम्मू-कश्मीर के बिजली विभाग (पीडीडी) में 35 साल और जलशक्ति विभाग में 28 साल से अस्थायी व्यवस्था पर काम चलाया जा रहा है। इन विभागों में लाइनमैन से लेकर मोटर मैकेनिक, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, पलंबर और फिटर तक का काम अस्थायी कर्मचारी देख रहे हैं। आलम यह है कि बिजली विभाग में 1987 के बाद लाइनमैन तक की सीधी भर्ती नहीं हुई है।
जलशक्ति विभाग में 1994 के बाद से विभाग में अस्थायी कर्मचारी ही जलापूर्ति को सुचारु बनाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा ड्राइवर, कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर पलंबर, फिटर, मोटर ऑपरेटर आदि का कार्य भी अस्थायी कर्मचारी ही कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी नहीं किया जा रहा है।
जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारी संघ के प्रवक्ता रवि हंस का आरोप है कि वर्तमान में प्रति माह अस्थायी कर्मियों का वेतन 9000 रुपये तो किया गया है, लेकिन वह भी मासिक आधार पर नहीं मिलता। ऐसे में आगामी दिनों में आंदोलन करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।
भाजपा की कमेटी जुटा रही डाटा केंद्र से लेकर एलजी को सौंपेगी रिपोर्ट
अस्थायी कर्मचारियों के मामले में भाजपा की ओर से गठित कमेटी के अध्यक्ष पूर्व मंत्री का कहना है कि जम्मू संभाग में सरकारी विभागों में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों के हालत, उनकी संख्या और वर्क कल्चर का ब्यौरा लिया गया है। बिजली विभाग में 1987 के बाद से स्थायी लाइनमैन तक की नियुक्ति नहीं हुई हैं। अस्थायी कर्मचारी जैसे तैसे काम चला रहे हैं। जम्मू संभाग के बाद अब कश्मीर संभाग में कमेटी सरकारी विभागों में अस्थायी कर्मचारियों के हालात का ब्यौरा लेगी और दस दिसंबर तक समग्र रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी, ताकि अस्थायी कर्मचारियों का पूरा डाटा व उनकी समस्याओं और मसलों को केंद्र व प्रदेश सरकार के समक्ष रखकर उनका हल करवाया जा सके।