कश्मीर की सबसे सुंदर और ठंडी घाटी गुरेज में चुनावी ताप का असर बहुत कम है। सबसे बड़ा कारण इसका बेहद ऊंचाई पर होना है। गुरेज का रास्ता देश की सबसे ऊंची चोटियों में शुमार राजदान पास, जो करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर है, से होकर जाता है। ऐसे में शहरी इलाकों के लोग इनसे अधिक घुलमिल नहीं पाते। ये सिर्फ पर्यटकों की राह तकते हैं, क्योंकि यही इनकी आय का प्रमुख साधन भी है।
श्रीनगर से लौटते समय राजदान में सेना कैंप पर एंट्री करा रहे गुलाम शब्बीर बताते हैं कि तीन दशक तक यह घाटी आतंकवाद की आग में झुलसी है। अब पहाड़ी पर जगह-जगह सेना ने कैंप बना लिए हैं। सेना के जवान गश्त करते रहते हैं। आती-जाती सभी गाड़ियों का नंबर और उनमें बैठे लोगों की जानकारी दर्ज की जाती है।
आने-जाने का कारण भी पूछा जाता है। इतनी मशक्कत के बाद अब इस घाटी में अमन-चैन कायम है। सुविधाओं पर बात करते हुए वह बताते हैं कि यहां कुछ रिफ्यूजी गांवों में तो पिछले साल ही बिजली पहुंची है। यहीं मिले फारूक बताते हैं कि चुनाव से उन लोगों को बहुत फर्क नहीं पड़ता। पहले सड़कें नहीं थीं।
कई साल तक तो श्रीनगर ही नहीं देखा था। घाटी में लोग भेड़ पालन करते हैं और किशन गंगा नदी में मछली पकड़ते हैं। उसी से रोजी-रोटी चल रही है। पिछले कुछ सालों से पर्यटक घूमने आने लगे हैं। उनके ठहरने और खाने की व्यवस्था कर पैसा कमा लेते हैं। इसके चलते लोगों ने घर भी ठीक बनवा लिए हैं।