जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दल महिलाओं और युवाओं को अपने पक्ष में लाने के लिए विभिन्न आकर्षक वादे कर रहे हैं। महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर और युवाओं को निशुल्क कोचिंग जैसी योजनाओं के जरिए दल अपने चुनावी घोषणापत्र में विविध वादे शामिल कर रहे हैं।
महिलाओं को लुभाने के लिए कई दलों ने मुफ्त गैस सिलेंडर का वादा किया है, जिसे उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसके अलावा, कुछ दलों ने महिलाओं को सालाना 18,000 रुपये से लेकर प्रति माह 5,000 रुपये तक देने का प्रस्ताव भी रखा है। इन वादों का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक लाभ पहुंचाकर चुनावी समर्थन प्राप्त करना है।
युवाओं को आकर्षित करने के लिए भी दलों ने कई योजनाएं प्रस्तुत की हैं। निशुल्क कोचिंग और भर्ती परीक्षाओं के आवेदन में छूट जैसे वादे प्रमुख हैं। नेकां ने 180 दिन में युवाओं के लिए एक व्यापक नौकरी पैकेज, एक लाख नौकरियां, और सरकारी विभागों में रिक्तियों को भरने का वादा किया है। इसके अतिरिक्त, कमजोर वर्गों के परिवार की महिला मुखिया को प्रति माह 5,000 रुपये देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
भाजपा ने पंडित प्रेम नाथ डोगरा रोजगार योजना के तहत 5 लाख रोजगार अवसर पैदा करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, प्रगति शिक्षा योजना के तहत कॉलेज छात्रों को हर साल 3,000 रुपये का यातायात भत्ता और जेकेपीएससी और यूपीएससी की तैयारी के लिए दो साल तक 10,000 रुपये कोचिंग फीस की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। 10वीं कक्षा के छात्रों को टेबलेट और लैपटॉप भी देने का दावा किया गया है। पीडीपी ने संपत्ति कर और स्टांप शुल्क को खत्म करने का वादा किया है, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जो संपत्ति खरीदेंगी।
हालांकि, राजनीतिक दल महिलाओं और युवाओं को आकर्षित करने के इन वादों के बावजूद, उम्मीदवारों की सूची में महिलाओं की संख्या अभी भी सीमित है। प्रमुख दलों जैसे कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और भाजपा में महिलाओं के उम्मीदवारों की संख्या अत्यधिक कम है, जिसमें अधिकतम दो और न्यूनतम एक उम्मीदवार हैं। कांग्रेस का घोषणापत्र अभी तक जारी नहीं किया गया है, जबकि अन्य दलों के घोषणापत्र महिलाओं और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित हैं। इन वादों के माध्यम से दलों ने चुनावी मैदान में जीत की उम्मीद लगाए बैठी हैं, लेकिन वास्तविकता में इन योजनाओं की कार्यान्वयन की गारंटी अभी भी बाकी है।