उधमपुर की रामनगर विधानसभा सीट के आरक्षित होने के साथ ही यहां की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। भाजपा और पैंथर्स पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच की कांटे की टक्कर अब समाप्त हो गई है। क्योंकि दोनों ही नेता अब सामान्य वर्ग की सीटों पर जाएंगे। भाजपा ने रणबीर सिंह की जगह सुनील को इस बार उम्मीदवार के रूप में पेश किया हैं। पैंथर्स पार्टी और कांग्रेस ने अभी तक अपना प्रत्याशी तय नहीं किया है।
रामनगर के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां चार बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। और भाजपा ने दो बार जीत दर्ज की है। और पैंथर्स पार्टी के हर्ष देव सिंह ने 1996 से 2008 तक लगातार तीन चुनावों में जीत हासिल की। 1962 में नेशनल कॉन्फ्रेंस को भी एक बार रामनगर का नेतृत्व करने का मौका मिला था। लेकिन, 2024 के विधानसभा चुनावों में रामनगर सीट आरक्षित हो जाने के बाद यहां की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह से बदल गई है।
भाजपा ने रणबीर सिंह की जगह युवा चेहरा सुनील को उतारा है। जो छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के लिए एक नया संदेश लेकर आएंगे। पैंथर्स पार्टी और कांग्रेस ने अभी तक अपने प्रत्याशियों का चयन नहीं किया है। जिससे इस बार के चुनावी मुकाबले में अप्रत्याशित स्थिति बन सकती है।
2014 में, जब पैंथर्स पार्टी का गढ़ माना जाने वाला रामनगर क्षेत्र भाजपा के लिए एक चुनौती था। तो भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए आरएस पठानिया को मैदान में उतारा। पैंथर्स पार्टी के हर्ष देव सिंह को हराकर भाजपा को जीत दिलाई थी और इसने पैंथर्स पार्टी के गढ़ में सेंध लगाकर जीत का झंडा लहराया था। इस बार परिसीमन ने पूरी तस्वीर बदल दी है। क्योंकि रामनगर की मजालता तहसील अब उधमपुर वेस्ट के साथ जोड़ दी गई है।
नए परिसीमन और बदलती राजनीति के साथ, रामनगर में चुनावी मुकाबला इस बार काफी दिलचस्प होने वाला है।