जम्मू। भारत नवाचार और प्रौद्योगिकी का मानव जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयोग कर रहा है। बीते कुछ महीनों से पाकिस्तान सीमा पार से ड्रोन में विस्फोटक सामग्री भेजकर मानवता को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन भारत ने साबित कर दिया कि वह ऐसे ड्रोन का मानव जीवन की सुरक्षा के लिए शांतिदूत की तरह इस्तेमाल कर रहा है। यह आधुनिक भारत का यंत्र दूसरे अवतार के रूप में संजीवनी बूटी की तरह लाभार्थियों तक पहुंचेगा। यह बात शनिवार को सीएसआईआर-आईआईआईएम में भारत निर्मित ड्रोन चिकित्सा वितरण प्रणाली के सफल ट्रायल पर पीएमओ में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही। आईआईआईएम से उपजिला मढ़ तक ड्रोन के माध्यम से दस किलो के वजन वाले बॉक्स में कोविड वैक्सीन को हवाई मार्ग से पहुंचाया गया।
डॉ. जितेंद्र ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की आवश्यकताओं की सूची के मुताबिक ड्रोन सेवा मुहैया करवाई जाएगी। ड्रोन सिर्फ वैक्सीन तक सीमित नहीं होगा। इस विकल्प का अधिक लाभ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले जम्मू-कश्मीर के अलावा अरुणाचल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड जैसे राज्यों में होगा। टीकाकरण सहित अन्य आपात सेवाओं के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होगा। जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह जैसे स्थान पर तीन घंटे में वैक्सीन वितरण का समय लग जाता है, लेकिन ड्रोन से मात्र 45 मिनट में इसे पहुंचाया जाएगा।
1947 में अंतरिम सरकार में सीएसआईआर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पहला उपप्रधान बनाया गया था। उस समय गिनी चुनी लेबोरेटरी में जम्मू में एक ड्रग रिसर्च लैब थी। भारत में माइक्रो मैनेजमेंट पर काम किया जा रहा है। मोदी सरकार के नेतृत्व में सफल कोविड प्रबंधन किया गया है। भारत के पास पर्याप्त पीपी किट है और आधुनिक तकनीक से इस्तेमाल पीपी किट को दोबारा इस्तेमाल में लाया जा रहा है। विश्व के 95 देशों में भारत से कोविड वैक्सीन भेजी जा रही है। भारत कोविड से पहले ही एंटी वायरल ड्रग पर काम कर रहा था। विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग ने आधुनिक वेंटिलेटर तैयार किया। सौ करोड़ टीकाकरण का कीर्तिमान पूरा होने के बाद हर घर दस्तक का लक्ष्य रखा गया है।
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एरोमा मिशन पर काम हो रहा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर लेबोरेटरी के तहत एरोमा मिशन शुरू हुआ है। इसमें कृषि उद्यमिता, कृषि स्टार्टअप, कृषि टेक्नोक्रेट्स क्षेत्र में लाभ मिलेगा। भद्रवाह, रियासी जैसे क्षेत्रों में एक एकड़ जमीन में आज युवा लाखों रुपये कमा रहे हैं। कृषि और डेयरी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। आईआईआईएम लेबोरेटरी में पहली कैना विस मेडिकेशन पर भी काम किया जा रहा। इसमें दर्द निवारक औषधियों के लिए सभी तरह की मंजूरी लेकर खेतीबाड़ी, और व्यवसायी किया जा रहा है। यह भारत का पहला प्रोजेक्ट है। इसी लेबोरेटरी से देश में पहली मिंट टेबलेट दी थी।