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जम्मू-कश्मीर: दोमाना के घरोटा स्कूल की डगर दूर, पांचवीं के बाद नौनिहाल पढ़ाई छोड़ने को मजबूर..सरकार से गुहार

Sun, 30 Apr 2023 02:19 PM IST
विमल शर्मा हरदीप ठाकुर, दोमाना (जम्मू)

सार

इलाके की आबादी करीब 2300 है। इनमें 400 के करीब 11 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। सौबका और बंजारा गांव चारों तरफ से जंगल से घिरे हैं, जिससे बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से अभिभावक डरते हैं।
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दोमाना स्थित स्कूल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दोमाना से घिरी भलवाल कस्बे की पंचायत घरोटा अपर-बी में पांचवीं के बाद बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। कारण - मिडिल स्कूल की दूरी साढ़े तीन और हाई स्कूल तीन किलोमीटर दूर है। पंचायत के गांव सौबका और बंजारा में दो सरकारी प्राइमरी स्कूल तो हैं, लेकिन मिडिल स्कूल न होने से दो साल में पांचवीं के बाद नौ बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी है।

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पंचायत में सात वार्ड आते हैं और इनकी आबादी करीब 2300 है। इनमें 400 के करीब 11 साल से कम उम्र के बच्चे हैं।  सौबका और बंजारा गांव चारों तरफ से जंगल से घिरे हैं, जिससे बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से अभिभावक डरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग होने के कारण कोई बस भी नहीं चलती।

चार साल पहले जहां बस सेवा मिली थी, लेकिन अब वह भी बंद हो गई है। ऑटो चलते हैं, लेकिन ज्यादा किराए के साथ समय भी अधिक लगता है। पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों को तीन किलोमीटर दूर दूसरी पंचायत के हाई स्कूल या फिर साढ़े तीन किलोमीटर दूर मिडिल स्कूल डूमी छोड़ने-लाने के लिए अभिभावकों को खुद जाना पड़ता है।
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जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं, उनके बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं, खासकर लड़कियां। सरपंच जोगिंद्र सिंह ने बताया कि 1967 में पंचायत को सौबका में प्राइमरी स्कूल मिला था। वह भी इसी स्कूल से पढ़े हैं। इसमें भी कई बच्चों को दूर से आना पड़ता था।

इसके बाद पंचायत में 2004 में दूसरा प्राइमरी स्कूल बंजारा गांव में खुलवाया। लेकिन बच्चों की 5वीं के बाद पढ़ाई जारी रखने के लिए पंचायत में कोई भी सरकारी स्कूल नहीं है। 

स्कूल की परेशानी, ग्रामीणों की जुबानी

ग्रामीण गुरमीत कौर ने बताया कि उनकी दस साल की बेटी अब पांचवीं कक्षा पास कर चुकी है। स्कूल दूर होने के कारण बेटी को अकेले भेजने में डर लगता है, इसलिए अब उसको घर पर ही रखा है। रजनी देवी ने बताया कि उनका 11 साल का बेटा पांचवीं पास कर चुका है, लेकिन स्कूल दूर है, जिससे अभी तक उसका दाखिला नहीं करवाया है, क्योंकि पति मजदूरी करते हैं।

सुबह घर से जाते हैं और शाम को लौटते हैं। मैं घर के काम में व्यस्त रहती हूं, इसलिए बच्चे को लाने और छोड़ने के लिए समय नहीं मिलता। बेटी दूसरी कक्षा में है, अगर सौबका में मिडिल स्कूल नहीं बना तो उसको भी पांचवीं कक्षा के बाद नहीं पढ़ा पाएंगे। नेहा कुमारी ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा है।

बेटा सातवीं और बेटी आठवीं कक्षा में डूमी हाई स्कूल में पढ़ती है। तीन किलोमीटर रोजाना बच्चों को स्कूल में पैदल छोड़ना और लाना पड़ता है। पति मजदूरी करते हैं, इसलिए प्राइवेट स्कूल में भी बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। बबली देवी ने बताया कि बेटा सातवीं कक्षा में डूमी हाई स्कूल में पढ़ता है।

यातायात सुविधा न होने के कारण पहले बेटे को डूमी हाई स्कूल और फिर बेटी को रोजाना सौबका प्राइमरी स्कूल में छोड़ने जाना पड़ता है। सारा समय बच्चों को छोड़ने और लाने में लग जाता है, तो घर का काम कब करें।

कुछ दिन पहले ही डीडीसी अध्यक्ष भारत भूषण और जेडईओ भलवाल ने स्कूल की जानकारी दी थी। स्कूल को अपग्रेड करने की एक प्रक्रिया होती है। जेडईओ भलवाल को निर्देश दिया गया है कि स्कूल को अपग्रेड करने की संभावनाएं तलाशें, इसकी जांच की जाए। जल्द ही इस पर काम किया जाएगा। - सूरज सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी 

पंचायत के लोग उनके पास स्कूल की समस्या लेकर आए थे। पंचायत में एक भी मिडिल स्कूल नहीं होने से बच्चों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में मुश्किल हो रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार, डायरेक्टर रवि कुमार और सीईओ सूरज सिंह से बात की है। सरकार और शिक्षा विभाग को जल्द स्कूल का दर्जा बढ़ाना चाहिए।  - भारत भूषण, डीडीसी अध्यक्ष, जम्मू

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