जिस लड़की को बचपन में यह पता नही था कि महिला क्रिकेट टीम भी होती है, वह बड़ी होकर मेहनत से न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि चैलेंजर ट्रॉफी में खेले, ऐसा करना हर किसी के लिए आसान नहीं। इस सफर को जम्मू जिले के सीमावर्ती क्षेत्र बिश्नाह के गांव करयाल ब्राह्मणा की रहने वाली सरला देवी ने तय किया है। सरला का नाम आज जम्मू-कश्मीर महिला क्रिकेट टीम के बड़े खिलाड़ियों में आता है।
सरला देवी ने कहा कि बचपन से खेलों के प्रति रुझान था। इसका एक कारण घर में दो बड़ी बहनों का कबड्डी की राष्ट्रीय खिलाड़ी होना भी था। मेरा रुझान क्रिकेट की तरफ था, लेकिन मुझे यह पता नहीं था कि महिला क्रिकेट टीम भी होती है। सरला ने बताया कि 2009 में उसने अपने गुरुजी के कहने पर क्रिकेट खेलना शुरू किया। स्टेडियम गई और लोगों के मार्गदर्शन में क्रिकेट को समझा। एक साल बाद 2010 में अंडर-19 में चयन हुआ।
इसके बाद चार साल अंडर-19 खेला और फिर सीनियर टीम में चयन हुआ। अंडर-19 में मैने नॉर्थ जोन खेला, अंडर-23 और सीनियर की नॉर्थ जोन टीम में भी उनका चयन हुआ। क्रिकेट के शुरूआती दौर में टीम में चयन को लेकर कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन अपने गांव से स्टेडियम तक सफर करना बड़ी चुनौती थी। कभी-कभी प्रैक्टिस में देरी हो जाती तो शाम के समय अकेले घर जाने में डर लगता, लेकिन मैने (सरला) हमेशा इससे ज्यादा अपने खेल पर ध्यान दिया और प्रदेश की सीनियर टीम में स्थान पक्का किया।
भारतीय महिला टीम का हिस्सा बना है सपना
सरला देवी का चयन महिला चैलेंजर ट्रॉफी में हुआ था। उन्होंने कहा कि चैलेंजर ट्राफी में उन्हें काफी सीखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलकर मैने अपने खेल में काफी सुधार भी किया। इस सफर के अनुभव को अपने खेल में उतारूंगी, ताकि भविष्य में इस तरह के मुकाबलों में और अच्छा प्रदर्शन कर सकूं।
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महिला क्रिकेट के प्रति बदल रही सोच
सरला देवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में अब महिला क्रिकेट के प्रति सोच बदल रही है। नए निजाम में टीम को सिलेक्शन ट्रायल से लेकर अभ्यास मैच करवाए जा रहे हैं, जिससे टीम के प्रदर्शन के साथ खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन में असर हुआ है। सीनियर वुमेन ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर की टीम ने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया है।