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कोंसर नाग झील यात्रा की शुरुआत दो अगस्त से

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रियासी। कोंसर नाग झील की यात्रा दो अगस्त से शुरू होगी। लगभग एक सप्ताह तक चलने वाली इस यात्रा की तैयारियों को लेकर रविवार को बैठक की गई। इस वर्ष दसवी कोंसर नाग यात्रा निकाला जाएगा। यात्रा प्रबंधन कमेटी के सदस्यों ने बताया कि दो अगस्त को यात्रा की शुरुआत होगी। इस दिन यात्रा जिला मुख्यालय से शुरू होगी और वाया सलाल, अरनास, धरमाडी व माहौर से होते हुए चसाना पहुंचेगी। जहां पर रात्रि विश्राम किया जाएगा। चसाना तक पहुंचने के लिए विभिन्न प्रकार के वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
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तीन अगस्त को यात्रा चसाना से साडी गांव के लिए पैदल रवाना होगी। जो देर शाम को वहां पहुंचेगी। अगले दिन चार तारीख को यात्रा साडी से कोंसर नाग के लिए रवाना होंगी। दो दिनों तक यात्रा पहाड़ी तथा दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। पांच तारीख सुबह नाग पंचमी के मौके पर कोंसर नाग में स्थित प्राकृतिक व पवित्र झील में यात्रा में शामिल लोग स्नान करेंगे।
इसके बाद पूजा बगैरह भी की जाएगी। इसी दिन यात्रा वापस होगी। रात को साडी में रुकने के बाद अगले दो दिनों के भीतर वापस रियासी पहुंचेगी। बैठक में कहा गया कि जिला प्रशासन को यात्रा में शामिल लोगों के लिए जरूरी इंतजाम करवाने को कहा गया है। इसके साथ ही पुलिस से सुरक्षा व्यवस्था भी देने को कहा गया है। गौरतलब है कि कोंसर नाग झील का यह स्थान जिला के अंतिम छोर पर है। लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस झील का सिरा शोपियां जिले से भी लगता है।
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विष्णु पुराण में मिलता है जिक्र
कोंसर नाग झील का उल्लेख विष्णु पुराण में भी मिलता है। इस झील के बारे में बताया गया है कि झील को भगवान विष्णु ने अपना एक पैर मार कर बनाया था। झील में नाग पंचमी के अवसर पर स्नान करने का महत्व बताया जाता हैै। आतंकवाद ग्रस्त इलाका होने के कारण जहां पर पहुंच पाना काफी मुश्किल भरा कार्य था। पिछले दस वर्षो से ही इस स्थान के लिए यात्रा का आवागमन हो रहा है।
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