प्रधान सत्र न्यायाधीश जम्मू संजय परिहार ने नशा तस्करी मामले में संजीव कुमार को 20 साल के कठोर सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने पर एक साल की सजा अतिरिक्त भुगतनी होगी।
दोषी से 10 किलो हेरोइन बरामद हुई थी। पुलिस के अनुसार 24 नवंबर 2017 को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर पुलिस स्टेशन गांधी नगर की टीम गश्त पर थी। इसी दौरान शास्त्री नगर श्मशानघाट के पास नेशनल हाईवे पर एक वाहन (पीबी 10जीबी-6247) की तलाशी ली गई।
यह वाहन गंग्याल से शास्त्री नगर की ओर जा रहा था। चालक ने अपना नाम संजीव कुमार निवासी मीरां साहिब बताया। तलाशी में वाहन की डिक्की से एक बैग बरामद हुआ। इसमें नौ पैकेट हेरोइन के थे। इस बारे में आरोपी कुछ नहीं बता पाया।
आरोपी ने वाहन का प्रयोग शास्त्री नगर जम्मू के युवकों को हेरोइन बेचने के लिए किया था। उस पर धारा 8, 21, 22 एनडीपीएस अधिनियम के तहत पुलिस स्टेशन गांधी नगर में दर्ज किया गया। पूछताछ के बाद आईओ और मजिस्ट्रेट ने आरोपी के घर इंदिरा नगर मीरां साहिब में जाकर एक किलो हेरोइन के साथ 24 लाख 21 हजार 350 रुपये बरामद किए।
नशीली दवाओं का उपयोग बड़ी समस्या
अधिवक्ता फहीम शौकत भट ने दलील दी कि मामले में साबित तथ्य यह है कि दोषी के पास 10 किलो हेरोइन थी। यूटी ही नहीं बल्कि देश में भी नशीली दवाओं का उपयोग एक बड़ी समस्या बन गया है। युवा पीढ़ी नशे के जाल में फंसती जा रही है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नारकोटिक ड्रग्स के इस प्रसार और समाज पर इसके प्रभाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने और मिटाने के लिए कठोर सजा देने की जरूरत है। दोषी पहली बार अपराधी है।
इस तरह के कृत्यों में शामिल होने का कोई पिछला इतिहास नहीं है, लेकिन बरामद की गई हेरोइन की मात्रा को देखते हुए कानून के तहत प्रदान की गई अधिकतम सजा को इस मामले में सुनाया जाना चाहिए। इसलिए दोषी संजीव कुमार को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8, 21 के तहत दोषी ठहराया जाता है।