पार्टी में भी ऐसी चर्चा है कि अगर रमण भल्ला को बाहु और टोनी को आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण सीट से उतारा जाता तो पार्टी के खाते में दो सीटें संभावित थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बाहु विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने भाजपा के 37202 वोटों के मुकाबले 36156 वोट हासिल करके कड़ी टक्कर दी थी। रमण भल्ला ने 2008 में गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।
छंब सीट पर सतीश शर्मा का दबदबा अधिक थाउधर, छंब सीट पर भी पार्टी टिकट देने में यह गलती कर गई। इस सीट से पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिवंगत मदन लाल शर्मा के बेटे सतीश शर्मा का दबदबा अधिक लग रहा था। 2014 के विधानसभा चुनाव में छंब सीट एससी के लिए आरक्षित थी। इससे पहले 2008 के चुनाव में कांग्रेस के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। लेकिन 16 साल बाद भी वह इसी सीट से लड़ने के लिए अड़े रहे, जबकि 2024 में यह सीट सामान्य वर्ग में चली गई थी। तारा चंद को अधिक एसी वोट का समर्थन था। जिससे छंब सीट से भी पार्टी को हार देखनी पड़ी और पार्टी से ही बागी निर्दलीय उम्मीदवार सतीश शर्मा बाजी मार गए। इस सीट पर तारा चंद तीसरे नंबर पर रहे।
पार्टी नेता एक-दूसरे पर फोड़ रहे हार का ठीकरा
पार्टी में यह भी चर्चा है कि अगर तारा चंद को इस बार आरक्षित हुई अखनूर सीट से उतार दिया जाता तो समीकरण बद सकते थे, क्योंकि वहां भाजपा प्रत्याशी मोहन लाल के मुकाबले कांग्रेस को एससी का तारा चंद चेहरा मिल जाता। लेकिन पार्टी ने ऐसा न करके यह सीट भी गंवा दी। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी अशोक कुमार दूसरे स्थान पर रहे।
इन चार सीटों पर हार के बाद पार्टी के भीतर चिंतन के साथ एक दूसरे पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। कुल मिलाकर पार्टी के दिग्गज अगर संभावित सीटों पर लड़ते तो कांग्रेस के विधायकों का आंकड़ा बनने की संभावना थी। पिछले नौ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस चुनाव में सबसे न्यूनतम प्रदर्शन करके सिर्फ छह ही सीटें हासिल की हैं, जिसमें से जम्मू संभाग से सिर्फ एक ही सीट मिली है। इन सारे परिदृश्य के बाद पार्टी संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल की तैयारी की जा रही है, ताकि आगामी चुनाव के लिए प्लेटफार्म तैयार किया जा सके।