इस दौरान बर्फबारी का गाढ़ा रंग चारों ओर नजर आएगा। इस अवधि को सर्दियों का सबसे कठिन समय माना जाता है। बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है। पर्यटकों को यह दौर खूब भाता है। गुलमर्ग, सोनमर्ग से लेकर घाटी का प्रत्येक पर्यटन स्थल सैलानियों से पटा नजर आता है परंतु यहां रहने वाले आम लोगों के लिए यह काफी कठिन दौर होता है।
कश्मीर घाटी में 40 दिन के भीषण ठंड का दौर बुधवार से शुरू हो रहा है, जो 31 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान बर्फबारी का गाढ़ा रंग चारों ओर नजर आएगा। इस अवधि को सर्दियों का सबसे कठिन समय माना जाता है। बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है। पर्यटकों को यह दौर खूब भाता है। गुलमर्ग, सोनमर्ग से लेकर घाटी का प्रत्येक पर्यटन स्थल सैलानियों से पटा नजर आता है परंतु यहां रहने वाले आम लोगों के लिए यह काफी कठिन दौर होता है।
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इस बार चिल्ले कलां से पहले श्रीनगर का न्यूनतम तापमान माइनस 3.6 डिग्री सेल्सियस तक गिरने से लोगों को भीषण ठंड का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती ठंड से लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। उनका मानना है कि चिल्ले कलां इससे भी भीषण रुख अपना सकता है, जिसके कारण दिक्कतें बढ़ सकती हैं। बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं। बिजली की खपत बढ़ जाती है। इस दौरान विद्युत लाइनों का रखरखाव काफी कठिन हो जाता है।
जम्मू-श्रीनगर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 44 बंद हो जाता है जिसके कारण घाटी तक खाने-पीने का सामान पहुंचना मुश्किल होता है। पर्याप्त भंडारण के बावजूद रसोई गैस व पेट्रोलियम उत्पादों का संकट उत्पन्न हो जाता है। शोपियां से जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाला मुगल रोड इस दौरान प्राय: बंद ही रहता है।
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मौसम विभाग के अनुसार चिल्ले कलां के पहले सप्ताह मौसम शुष्क रहने की संभावना है जबकि रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि 25 दिसंबर के बाद पश्चिमी दबाव के चलते मौसम प्रभावित हो सकता है।
चिल्ले बच्चां में सबसे कम होती है ठंड
बता दें कि सर्दियों के भीषण 40 दिन के बाद चिल्ले खुर्द की शुरुआत होती है जो 20 दिन तक चलता है। फर्क इतना होता है कि इसमें ठंड चिल्ले कलां से थोड़ी कम होती है। आखि़र में आता है चिल्ले बच्चां, जोकि 10 दिन का होता है और इस दौरान सर्दी सबसे कम होती है।