बिजली के झटके से होने वाली मौत को महज दुर्घटना बताकर नजरअंदाज किया जाता है। यह बातें न्यायमूर्ति वसीम सादिक नर्गल की पीठ ने 28 सितंबर 2013 को जम्मू के जानीपुर में ट्रांसफॉर्मर पर बिजली बहाली के काम के दौरान मारे गए जतिंदर कुमार के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहीं।
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मामले पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय ने आयुक्त सचिव पीडीडी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यों की संविधान समिति को निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
समिति के सदस्यों में मुख्य अभियंता, पीडीडी जम्मू, कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं। अदालत ने कहा, समिति हर महीने दो बार बैठक करेगी और सुरक्षा उपायों और नियमों की निगरानी सुनिश्चित करेगी। अदालत ने कहा कि विद्युत दुर्घटनाओं के अधिकतम मामले लटके हुए तारों, मानव हाथों की पहुंच योग्य दूरी के भीतर ओवरहेड तारों के गुजरने के कारण होते हैं।
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इस संबंध में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम 2010 का युद्धस्तर पर यानी तीन सप्ताह की अवधि के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। अदालत ने कहा, नियमों का उल्लंघन हादसों का मूल कारण है। संविधान का अनुच्छेद 21 देश के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार सुनिश्चित करता है।