प्रॉपटी टैक्स लागू करने के फैसले के खिलाफ कारोबारी भी उतर आए हैं। जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार से इसे जल्द वापस लेने की अपील की है। साथ ही आंदोलन की चेतावनी दी। जम्मू में शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में चैंबर के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग खासतौर से व्यापारी पिछले डेढ़ सालों से आर्थिक तंगहाली से गुजर रहे हैं।
पांच अगस्त 2019 के बाद बने हालात की वजह से जम्मू-कश्मीर में शटडाउन रहा। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से ही कोई बड़ी आर्थिक गतिविधि नहीं हुई है। बेरोजगार युवाओं की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है। इस वजह से एक ओर शुल्क के लिए लोग तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में व्यापार को लॉकडाउन व रूटीन की गतिविधियां न होने से भारी नुकसान हुआ। लोगों की नौकरियां चली गईं।
देश के कई राज्यों ने अपने लोगों को राहत देने के लिए शुल्क में कटौती की लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुल्क कम करने के बजाय एक के बाद एक टैक्स लोगों पर थोपने का काम शुरू किया हुआ है। इस वजह से लोग आर्थिक तौर पर ओर कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर आर्थिक, भौगोलिक और राजनीतिक तौर पर संवेदनशील प्रदेश हैं। लोग सरकार से टैक्स नहीं राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
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इस दौरान अरुण गुप्ता ने कहा अगर सरकार ने संपत्ति शुल्क का फैसला वापस न लिया तो जम्मू के लोग और व्यापारी आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता, महासचिव गौरव गुप्ता, सचिव राजेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष राजेश गुप्ता भी मौजूद रहे।
लखनपुर में रोक से पर्यटक नहीं आ रहे
अरुण गुप्ता ने कहा देश के हर हिस्से को खोल दिया गया हैं। आवाजाही में कोई रोक टोक नहीं हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर में अभी भी रेड जोन बनाकर रखा हुआ है। इस वजह से पर्यटक जम्मू-कश्मीर में नहीं आ रहे। अंतरराज्यीय बस सेवा को भी लखनपुर के आगे नहीं आने दिया जा रहा। इसके पीछे का कारण उनकी समझ से बाहर है। इससे व्यापारियों को लेकर प्रदेश के लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।