कठुआ के लोहाई मल्हार के लोगों की बरसों पुरानी स्कूल की दशा सुधारने की मांग भले ही प्रशासन के कानों तक न पहुंची हो, लेकिन सीरत की सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने कमाल दिखाना शुरू कर दिया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार गहरी नींद से जाग गई है।
चौबीस घंटे के भीतर ही डेढ़ लाख टाइलें इमारत का काम पूरा करवाने के लिए लोहाई मल्हार पहुंचा दी गई हैं। मामला यहीं खत्म नहीं होता, पहली बार दूरदराज इलाके के इस स्कूल में शिक्षा निदेशक का दौरा होने जा रहा है।
यही नहीं, एक करोड़ रुपये के और काम समग्र शिक्षा के तहत प्रस्तावित हैं, जिसमें अब कंप्यूटर लैब से लेकर तीन अतिरिक्त क्लास रूम और आर्ट्स एंड क्रॉफ्ट रूम, तीन अतिरिक्त कमरे भी तैयार किए जा रहे हैं। निदेशक रविशंकर शर्मा ने बताया कि वे खुद स्कूल का जायजा लेने के लिए जा रहे हैं।
स्कूलों के ढांचे को विकसित करना एक लगातार चलने वाले प्रक्रिया है। जिस स्कूल का वीडियो वायरल हुआ है वहां एक करोड़ रुपये के काम बीते और इस वित्तीय वर्ष में मंजूर हुए हैं। जिनपर काम शुरू करने जा रहे हैं। इसके अलावा अधूरी इमारत का काम भी शुरू हो चुका है।
स्कूल की अधूरी इमारत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इस इमारत का निर्माण 91 लाख की लागत से किया जाना था लेकिन एक करोड़ चार लाख रुपये खर्च करने और प्रशासनिक मंजूरी हासिल किए बिना ही ऐसा करने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ था।
ऐसे में लगातार बढ़ रही लागत के चलते यह मामला पत्राचार में चलता रहा। अब इसका काम भी पूरा करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में जम्मू कश्मीर में स्कूलों के ढांचों को रिकार्ड स्तर पर विकसित किया जा रहा है। ऐसा अबतक कभी नहीं हुआ था।
यूटी कैपेक्स, जिला कैपेक्स के अलावा पंचायत ग्रांट और समग्र शिक्षा के तहत भी विकास कार्य अंजाम दिए जा रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या सीरत ने शिक्ष विभाग का फोकस दूर दराज स्कूलों की ओर भी बढ़ाया है तो उन्होंने कहा कि विभाग लगातार दूर दराज इलाकों में भी फोकस कर रहा है और इसके बाद और भी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।