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जम्मू-कश्मीर: जी-20 से पहले टीआरएफ पर बैन से पाकिस्तान को जोरदार झटका, टेरर फंडिंग पर भी लगेगी लगाम

Sat, 07 Jan 2023 02:13 AM IST
विमल शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद 2019 में टीआरएफ अस्तित्व में आया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल यानी 2022 में घाटी में 172 आतंकी मारे गए। इसमें सबसे अधिक लश्कर तथा उसके सहयोगी संगठन टीआरएफ के 108 रहे।
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जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबल - फोटो : PTI
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विस्तार
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जी-20 बैठकों से पहले केंद्र ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के सहयोगी संगठन द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) पर पाबंदी लगाकर पाकिस्तान को जोरदार झटका दिया है। पाकिस्तान की ओर से लगातार यह दुष्प्रचारित किया जाता रहा है कि टीआरएफ भारत का ही संगठन है जो कश्मीर की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।

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इस फैसले से न केवल पाकिस्तान को आईना दिखाया बल्कि दुनिया में भी यह संदेश देने की कोशिश की सीमा पार के इशारे पर यह संगठन कश्मीर घाटी में आतंकी फैला रहा है। पिछले तीन साल की कई आतंकी घटनाओं में टीआरएफ का हाथ साबित होने के बाद केंद्र ने उस पर प्रतिबंध लगाकर यह दिखा दिया कि सीमा पार के इशारे पर अब और अधिक हिंसा बर्दाश्त नहीं है।

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद 2019 में टीआरएफ अस्तित्व में आया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल यानी 2022 में घाटी में 172 आतंकी मारे गए। इसमें सबसे अधिक लश्कर तथा उसके सहयोगी संगठन टीआरएफ के 108 रहे। अन्य आतंकी जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, अल बद्र तथा अंसार गजवातुल हिंद से जुड़े रहे।
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100 युवाओं ने आतंक का दामन थामा जिसमें 74 लश्कर-टीआरएफ में शामिल हुए। यानी घाटी में आतंकी बनने वाले युवाओं ने सबसे अधिक टीआरएफ का दामन थामा। अस्तित्व में आने के बाद से ही टीआरएफ ने हाइब्रिड आतंकियों को जन्म दिया। टारगेट किलिंग से लेकर सुरक्षा बलों पर हमले में इनका हाथ रहा।

कश्मीरी पंडितों, महिला हिंदू व सिख शिक्षकों की हत्या, बाहरी मजदूरों पर हमले समेत सुरक्षा बलों के जवानों की टारगेट किलिंग में इनका हाथ स्थापित हुआ। हाल ही में कश्मीर में कार्यरत पीएम पैकेज के कर्मचारियों कश्मीरी पंडितों की दो हिट लिस्ट भी कश्मीर फाइटर्स के नाम पर जारी की गई।

इससे उनमें दहशत है और वे जम्मू से कश्मीर जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दरअसल लश्कर पर प्रतिबंध के बाद पाकिस्तानी आईएसआई के इशारे पर टीआरएफ का गठन किया गया। प्रचारित किया गया कि यह कश्मीरी युवाओं का समूह है जो कश्मीर की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।

इसी संगठन की आड़ में पाकिस्तान ने कश्मीर में हिंसा का दुष्चक्र जारी रखा। दूसरा यह कि टीआरएफ की मदद से ही अन्य आतंकी संगठनों को फंडिंग उपलब्ध कराई जाने लगी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी संगठनों को वित्तीय पोषण बंद था जो टीआरएफ की मदद से पूरी होने लगा। 

जांच एजेंसियों के हाथ खुले, मददगारों पर भी शिकंजा 

टीआरएफ पर प्रतिबंध से जांच एजेंसियों के हाथ खुल गए हैं। अब उन्हें मामले की जांच करने में सहूलियत रहेगी। साथ ही मददगारों पर भी अब शिकंजा कस सकेगा। क्योंकि प्रतिबंध के बाद से इनकी सभी गतिविधियों को गैरकानूनी तरीके से देखा जाएगा। 

पाकिस्तान की चाल पहचान जी-20 से पहले सराहनीय फैसला

पाकिस्तान तंजीमों के नाम बदल बदलकर आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। लश्कर का नाम बदलकर ही उसने टीआरएफ रख लिया। भारत ने इस चाल को पहचानते हुए जी-20 बैठकों से पहले टीआरएफ पर प्रतिबंध लगाकर न केवल पाकिस्तान को झटका दिया है बल्कि दुनिया को भी दिखा दिया। केंद्र के इस फैसले के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। -डॉ. एसपी वैद, पूर्व डीजीपी जम्मू-कश्मीर

 
स्लीपर सेल को फंडिंग पर रोक होगी प्रभावी

टीआरएफ पर प्रतिबंध से आतंकियों तथा स्लीपर सेल को स्थानीय फंडिंग पर रोक लगेगी। पाकिस्तान तथा उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को तगड़ा झटका लगा है। पिछले तीन साल में उसने अपने कैडर काफी बढ़ा लिए। युवाओं खासकर दक्षिण कश्मीर में आतंकी संगठन में शामिल होने पर रोक लगेगी। - डॉ. जे जगन्नाथन-राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विभाग, जम्मू केंद्रीय विवि

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