पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर बैंक के विवाद पर कहा कि इस संस्थान को टेकओवर करने की योजना लंबे अरसे से पाइपलाइन में थी। यह योजना तब से शुरू हुई थी जब वह राज्य के मुख्यमंत्री थे। वे तब तक सफल नहीं हुए थे, लेकिन शायद राज्यपाल शासन में उन्होंने सोचा कि वे सफल हो जाएंगे।
स्किम्स के वार्षिक समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे तो यह योजना रची गई थी। उन्हें याद है कि वह तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी के कार्यालय में डिप्टी चेयरमैन प्लानिंग कमीशन के साथ थे। वह कह रहे थे कि बैंक अच्छा नहीं है और इसे टेकओवर कर लेना चाहिए। बाद में वह बैंक को लेकर मीडिया में छपी रिपोर्ट को उन तक भेजा।
बाद में डिप्टी चेयरमैन प्लानिंग कमीशन ने फोन कर बताया कि उन्हें गलत जानकारी दी गई थी। राज्यपाल शासन के बाद आने वाली सरकार को इस मामले को देखना होगा। बैंक की स्वायत्तता के साथ कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए। सज्जाद लोन द्वारा उन पर की गई टिप्पणी पर फारूक ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके हाथ कहीं भी खून से रंगे हैं।
धर्म के नाम पर वोट मांगने वालों पर हो कार्रवाई
फारूक ने कहा कि जो देश के कई हिस्सों में भगवान राम के नाम पर वोट बटोरने का सिलसिला शुरू हुआ है इसको लेकर चुनाव आयोग को संज्ञान लेना चाहिए। उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जो धर्म के नाम पर वोट मांग रहे हैं। बुलंदशहर की घटना पर दुख जताते हुए कहा कि ऐसे तत्वों का खत्म किया जाना चाहिए जो देश में अशांति फैलाना चाहते हैं। जल्द ही राज्य में चुनाव होंगे लेकिन गठबंधन किसके साथ होगा यह तभी देखा जाएगा।