एसीबी ने इस शिकायत के बाद एक और केस दर्ज किया। 2009 में भी अवैध नियुक्तियों के मामले की जांच शुरू की। कुल मिलाकर चार मामले दर्ज हैं और इनके चालान पेश किए। पूरे मामले की जांच करने के लिए 13 ट्रंक फाइलें जब्त की गई हैं। जज ने कहा कि फाइलें बहुत ज्यादा हैं। मामला बहुत गंभीर है। एक भी फाइल जारी करने से जांच बाधित हो सकती है।
कोर्ट ने कहा कि जिनकी फाइलें जब्त हैं, इनकी नियुक्तियां तमाम प्रक्रियाओं, भर्ती नियमों को ताक पर रखकर करने के आरोप हैं। ऐसे आरोप हैं कि यह नियुक्तियां नेताओं, अफसरों और प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर उनके सगे संबंधियों के लिए हुईं। बैंक के अधिकारियों ने इसमें पूरा साथ दिया। पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं का हक मारा गया है।
कैसे मांग रहे हैं इनके लिए इंक्रीमेंट
बैंक की ओर से कोर्ट में कहा गया है कि उनको बैंकिंग एसोसिएट और बैंकिंग अटेंडेंट के प्रमोशन और इंक्रीमेंट के लिए फाइलों की समीक्षा करनी है। इसलिए फाइलों को देखना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि हैरानी की बात है कि रिलीज करने का ऐसा आधार बनाया गया है। जिनकी नियुक्तियां अवैध होने की जांच की जा रही है, उन्हीं के लिए प्रमोशन करने का आधार बनाकर रिलीज करने की मांग की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि बैंक प्रबंधन ने नेताओं के कहने पर पूरी भर्ती प्रक्रिया और नियमों का मजाक उड़ाया है। यह नियुक्तियां वैध नहीं, पूरी तरह से अवैध हैं। फिर कैसे इनके लिए इंक्रीमेंट मांग रहे हैं।