शोपियां जिले का जैनापोरा इलाका झरनों की भूमि के नाम से जाना जाता है। यहां अनगिनत झरनों के साथ सेब के बगान हैं। वर्ष 2014 में यह विधानसभा वाची के नाम से जानी जाती थी। परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर जैनापोरा विधानसभा कर दिया गया है। यहां लोगों में मतदान को लेकर उत्साह है। लोग बदलाव के लिए मतदान करना चाहते हैं।
जैनापोरा सीट से 10 उम्मीदवार मैदान हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के बागी और वाची से पूर्व विधायक एजाज अहमद मीर निर्दलीय मैदान में हैं। नेकां ने शौकत हुसैन गनी, अपनी पार्टी ने गौहर हुसैन वानी और पीडीपी ने जीएच मोहि-उद-दीन वानी को उतारा है।
यहां चतुष्कोणीय मुकाबला बन रहा है। पीडीपी के बागी और पूर्व विधायक एजाज अहमद मीर को जमात का समर्थन है। वाची से विधायक रहे एजाज ने 2014 के विस चुनाव में 42.47 फीसदी वोट हासिल किए थे। नई सीट से पीडीपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
इस सीट पर नेकां और पीडीपी की राह भी आसान नहीं है। वाची सीट से 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इस सीट से जीत चुकी हैं। 2002 के चुनाव में इस सीट से सीपीआईएम के खलील नाइक ने पीडीपी के गुलाम हसन भट को 0.56 फीसदी वोट के अंतर से हराया था। ऐसे में इस बार इस सीट पर निर्दलीय और पार्टी के तीनों उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रहेगी।
रेल लाइन के सर्वे से खुश नहीं लोग
जैनापोरा में सेब बगान हैं, 90 फीसदी लोग सेब के कारोबार से जुड़े हैं। ऐसे में लोग चाहते हैं कि इलाके में रेल पहुंचे ताकि सेब का निर्यात करने में आसानी हो। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले इलाके में रेलवे ने सर्वे करवाया था, लेकिन उससे लोग खुश नहीं हैं।
उनका कहना है कि जहां से रेल लाइन का सर्वे हुआ वहां पर खेत और बगान ज्यादा हैं। ऐसे में रेल लाइन ऐसी जगह से निकले जहां कम से कम कृषि भूमि अधिग्रहित हो।
क्षेत्र के मुद्दे
सरकारी डिग्री पाठ्यक्रमों की कमी
स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी
बागवानों को नुकसान का नहीं मिलता पूरा मुआवजा
10 साल में क्या बदला
क्षेत्र को सरकारी डिग्री कॉलेज मिला
बंद और हड़ताल का आह्वान बंद हुए
पर्यटन स्थलों का विकास हुआ
कुल वोटर-1,08,493
पुरुष मतदाता-54134
महिला मतदाता-54357