जम्मू कश्मीर सरकार लोक कला के संरक्षण और कलाकारों के उत्थान को लेकर कितनी संजीदा है, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2019 और 2020 में कलाकारों द्वारा किए कार्यक्रमों का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।
चार साल से 55 साल से अधिक आयु वाले कलाकारों को पेंशन नहीं मिली है। कलाकारों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी का रवैया अनदेखी वाला है। जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी के साथ 256 विभिन्न कला संस्थाएं पंजीकृत हैं।
इसमें 38 जम्मू संभाग तो 118 कश्मीर संभाग में हैं। इन संस्थाओं के साथ तीन से चार हजार कलाकार जुड़े हैं। इसमें करीब एक हजार ऐसे कलाकार हैं, जिनकी आयु 55 साल से अधिक है और अकादमी इन कलाकारों को पेंशन के रूप में 25 सौ रुपये प्रति महीना देती है।
2019 के बाद इन कलाकारों को मासिक पेंशन नहीं मिली है। लोक कलाकार और पारंपरिक छज्जा नृत्य करने वाले धनी राम ने कहा कि मुझे भी अकादमी से पेंशन मिलती थी, लेकिन अब नहीं मिल रही है। अकादमी से मिलने वाली पेंशन और कार्यक्रम ही हमारे आय के स्रोत हैं।
लोक नृत्य हरणा करने वाले कलाकार मोहन लाल ने कहा कि 2019 से पहले अकादमी से जितने भी कार्यक्रम मिलते थे, अब नहीं मिल रहे हैं। 2019 और 2020 में अकादमी के साथ कार्यक्रम किए थे, जिनका भुगतान नहीं हुआ है।
जब भी अधिकारियों से पूछा जाता है तो वह उचित जवाब नहीं देते हैं। उन्होंने कहा कि सभी कलाकारों ने सोमवार को एक बैठक करने का फैसला लिया है। इसमें हम अपनी मांगों को अकादमी के सचिव के समक्ष भी रखेंगे।