जम्मू-कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेश 31 अक्तूबर 2019 को अस्तित्व में आने के बाद राजनीतिक पार्टियां भी पुनर्गठन के दौर से गुजरेगी। विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में अलग अलग प्रदेशाध्यक्ष हो सकते है।
उच्च पदस्थ पार्टी सूत्रों के अनुसार जम्मू कश्मीर राज्य को विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख 31 अक्तूबर से नई व्यवस्था के तौर पर काम करना शुरू कर देंगे। ऐसे में जिस प्रकार से केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली हो या फिर चंडीगढ़ या अन्य केंद्र शासित प्रदेशों का अपना राजनीतिक ढांचा होता हैं जिसमें प्रदेशाध्यक्ष से लेकर अन्य पदाधिकारी शामिल रहते है।
उसी प्रकार जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने और लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद यहां पर भी राजनीतिक ढांचे का स्वरुप बदल सकता है।
राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा और कांग्रेस का ढांचा जम्मू कश्मीर और लद्दाख में क्या रहेगा। इस बारे में इन पार्टियों का राष्ट्रीय नेतृत्व आने वाले दिनों में फैसला लेगा। फिलहाल प्रदेश स्तर के नेता इस मुद्दे पर आन रिकार्ड कुछ बोलने को तैैयार नहीं है। हालांकि नाम न छापने की तर्ज पर वह इतना जरूरी स्वीकार कर रहे हैं कि पार्टी स्तर पर भी ढांचागत बदलाव होना तय है।