जम्मू-कश्मीर में नौकरी और जमीन खरीदने को लेकर केंद्र सरकार डोमिसाइल नियमों को लागू करने पर विचार कर रही है। इसके तहत वहां सरकारी नौकरी, जमीन खरीदने, पेशेवर व शिक्षण कॉलेजों में दाखिले के लिए कम से कम 15 वर्षों तक जम्मू-कश्मीर का निवासी होना अनिवार्य शर्त होगी। सरकार ने यह कदम स्थानीय लोगों के मन में व्याप्त उस डर को दूर करने के लिए उठाया है कि बाहरी लोग उनकी नौकरियां और जमीन को खरीदकर उनका हक मार लेंगे।
गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की ही तर्ज पर जम्मू-कश्मीर में विशेष प्रावधान किए जाएंगे। गौरतलब है कि नगालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में अनुच्छेद 371 के तहत यह व्यवस्था दी गई है। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय सरकार की नौकरियों में बाहर से आए लोगों को राहत दी जाएगी। इनके लिए पांच साल तक जम्मू-कश्मीर का निवासी होने की अनिवार्यता होगी। इन कर्मचारियों के बच्चों जिन्होंने दसवीं और 12वीं की परीक्षा जम्मू कश्मीर या लद्दाख में पास की को भी यहां का निवासी माना जाएगा।
सही समय पर फैसला लेगा केंद्र: डॉ. जितेंद्र
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों के रोजगार और भूमि पर हक सुरक्षित रखने के मामले में केंद्र सरकार सही समय पर फैसला लेगी। जम्मू-कश्मीर अब सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं और यहां कल्पना से भी ज्यादा परिवर्तन आएगा। जम्मू के कन्वेंशन सेंटर में क्षमता निर्माण कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कहा कि 31 अक्तूबर, 2019 से जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से सभी केंद्रीय कानून यहां स्वत: लागू हो चुके हैं। अब केवल कानूनों की चरणवार रूप से अधिसूचना जारी की जा रही है।