सेना के अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालारूस से इमरजेंसी सूचना मिली। इसमें गर्भवती के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता का अनुरोध किया गया था। इसके बाद जवान मौके पर पहुंचे और महिला को अस्पताल पहुंचाया।
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सेना गर्भवती के लिए देवदूत बनकर पहुंची। जवानों ने सीमावर्ती जिले में भारी बर्फबारी के बीच आपातकालीन चिकित्सा बचाव अभियान चलाकर गर्भवती को अस्पताल पहुंचाया। वहां महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया।
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सेना के अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालारूस से एक इमरजेंसी सूचना मिली। इसमें दर्द, खून की कमी और तेज धड़कन से जूझ रही गर्भवती के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता का अनुरोध किया गया था।
क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण एंबुलेंस का सड़क पर चलना असंभव था जिससे स्थिति और भी बदतर हो गई। समय की गंभीरता और महिला के बिगड़ते स्वास्थ्य को समझते हुए सेना ने 2.5 टनर (विशेष वाहन) में चिकित्सा और बचाव दल भेजा।
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वहां किसी भी हल्के वाहन का चलना मुश्किल था। अधिकारी ने बताया कि बचाव दल ने महिला को सावधानी से वाहन पर चढ़ाया और भारी बर्फबारी में उपजिला अस्पताल कुपवाड़ा तक गाड़ी चलाई।
सेना की त्वरित कार्रवाई और समय पर सहायता से गर्भवती महिला की जान बची। परिवार और स्थानीय लोगों ने त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सेना के प्रति आभार व्यक्त किया। अधिकारी ने बताया कि महिला ने बाद में एक बच्ची को जन्म दिया।
लद्दाख में बर्फबारी, सिंगेला दर्रे से नवजात समेत चार रेस्क्यू
लद्दाख के लेह और कारगिल जिले में देर रात बर्फबारी से पूरे प्रदेश में सफेदी छा गई। लेह जिले में बर्फबारी के बीच एक कार में जा रहे परिवार में नवजात समेत चार लोग सिंगेला दर्रे पर फंस गए, जिन्हें बीआरओ और पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया।
कार से ये लोग लेह जिले में खलसे से नेरक की ओर जा रहे थे। सिंगेला दर्रे पर बर्फबारी होने से उनका वाहन फंस गया। आसपास आबादी वाला इलाका भी नहीं था। सूचना मिलते ही बीआरओ की 114 आरसीसी में जूनियर इंजीनियर प्रदीप राठौर के नेतृत्व में टीम रवाना की गई। पुलिस से भी सहयोग लिया गया। टीम ने चारों को सुरक्षित निकाला और फोटोक्सर गांव पहुंचाया।