फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूटी बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में 16 दिन स्पीकर पद पर बने रहे डॉ. निर्मल सिंह हुए पदमुक्त

Sun, 17 Nov 2019 11:14 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
डॉ. निर्मल सिंह (पूर्व जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष ) - फोटो : फाइल, अमर उजाला
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन एक्ट के लागू होने के बावजूद जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष पद पर 16 दिन तक बने रहे डॉ. निर्मल सिंह को पद मुक्त किए जाने का आदेश जारी हो गया है। डॉ. निर्मल सिंह के अनुसार उन्हें कानून, न्याय और संसदीय मामले विभाग का आदेश मिला है। इसके तुरंत बाद उन्होंने विधानसभा के वाहनों और आवास सुविधाओं को लौटाने दिया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी स्पीकर को आदेश जारी कर पद मुक्त करने की यह पहली घटना है।
विज्ञापन


जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन एक्ट को 30-31 अक्तूबर की मध्यरात्रि लागू किया गया था। इस एक्ट के लागू होते ही जम्मू-कश्मीर राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों में परिवर्तित हो गया। ऐसे में जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सारी शक्तियां स्वत: ही संसद को ट्रांसफर हो गईं। इधर, डॉ. निर्मल सिंह विधानसभा के पद पर दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बने रहे। इस बीच उन्होंने विधानसभा परिसर में स्थित विस अध्यक्ष का दौरा भी किया था। उनके पद पर बने रहने को लेकर चर्चा भी खूब हुई। 

अमर उजाला द्वारा पूछे जाने पर डॉ. निर्मल सिंह ने कहा कि उन्हें कानून, न्याय और संसदीय मामले विभाग का आदेश मिला है। इसके तुरंत बाद उन्होंने पद और इससे जुड़ी वाहन, आवास की सभी सुविधाएं छोड़ दी हैं। वह किसी विवाद में नहीं आना चाहते। लेकिन यह मामला भारतीय संविधान के बुनियादी ढांचे से जुड़ा हुआ है। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ है। इसलिए इस मुद्दे पर बहस जरूर हो सकती है।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

भाजपा का एक खेमा भी डॉ. निर्मल सिंह से नाराज
जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी डॉ. निर्मल सिंह के विधानसभा अध्यक्ष बने रहने से भाजपा का एक खेमा भी नाराज है। पार्टी के कई पदाधिकारी आवास पर जाकर डॉ. सिंह से संवैधानिक पद की गरिमा को बनाए रखते हुए पदमुक्त होने को कह चुके थे। सरकारी आदेश से पदमुक्त किए जाने पर भाजपा का एक खेमा पार्टी स्तर पर इसे मुद्दा बना सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार डॉ. निर्मल सिंह का पद पर बने रहना पार्टी के भीतर कई नेताओं को नागवार गुजरा है। उन्हें मौखिक रूप से पद मुक्त होने के संकेत दिए गए लेकिन वे फिर भी नहीं माने। आखिर में प्रदेश प्रशासन को केंद्र सरकार के अटार्नी जनरल से परामर्श कर आदेश जारी करवाना पड़ा। 

स्पीकर के पास रहते हैं कई अधिकार
विधानसभा सचिवालय में स्पीकर को कई अधिकार रहते हैं। पूर्व विधायकों से जुड़े मामलों के अलावा विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन को जारी करने में भी स्पीकर की भूमिका रहती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें