कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के कर्मचारियों (कश्मीरी पंडितों) के लिए बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल और शोपियां में कुल 576 फ्लैटों को तय समय सीमा से पहले तैयार कर लिया गया है। इन फ्लैटों को दिसंबर 2023 तक बनाना था। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को इन फ्लैटों का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह कदम कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं देने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उपराज्यपाल ने प्रदेश में बुनियादी ढांचे, रोजगार सृजन और जीवन को आसान बनाने के लिए शुरू किए गए प्रगतिशील सुधारों पर भी बात की। कहा, आज देशी-विदेशी कंपनियां जम्मू-कश्मीर में निवेश करने को तैयार हैं। यूटी में 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के राजमार्ग और सुरंग परियोजनाएं चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि जम्मू और श्रीनगर दोनों हवाई अड्डों पर उड़ान संचालन में वृद्धि, बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी ने जम्मू-कश्मीर को दुनिया के करीब ला दिया है। उपराज्यपाल ने विभिन्न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की विकास क्षमता का दोहन करने, नवोदित उद्यमियों को मदद देने, बड़े स्वरोजगार के अवसर पैदा करने और फास्ट ट्रैक और पारदर्शी भर्तियों को सुनिश्चित करने के लिए की गई प्रमुख पहलों को भी साझा किया।
वहीं सफीना बेग, डीडीसी अध्यक्ष, बारामुला ने अपने संबोधन में कहा कि पारगमन आवास कश्मीर में सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देंगे। मुख्य सचिव डॉ अरुण कुमार मेहता ने पीएम पैकेज कर्मचारियों के लिए आवासीय आवास समय पर पूरा करने में प्रशासन के प्रयासों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर नागरिक प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, पीआरआई सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
सरकार ने वर्ष 2021 में कश्मीर घाटी में पीएम पैकेज कर्र्मचारियों के आवास के लिए कश्मीर घाटी के 10 जिलों में 19 स्थानों का चयन किया था। इसमें से अधिकांश स्थानों पर काम चल रहा है।
कश्मीर पंडित कर्मचारी राकेश पंडिता ने कहा, यह एक बहुत अच्छी पहल है जब से इस रोजगार पैकेज की घोषणा की गई थी तब से हम पीड़ित थे लेकिन अब इस उद्घाटन के साथ जीवन आसान हो जाएगा। हमारा रहन-सहन सुधरेगा, सभी कर्मचारी सुख से रहेंगे।
सरकार को पहल करनी चाहिए क्योंकि सभी वापस आना चाहते हैं । एक अन्य कर्मचारी नीरू भट्ट ने कहा, कश्मीर अनिश्चितता का स्थान है, लेकिन यह एक अच्छा कदम है, जो लोग किराए के आवास में रह रहे थे। यह सुरक्षा की भावना देगा।
यह पूरी तरह से पुनर्वास नहीं है, लेकिन एक आर्थिक पैकेज हैं पुनर्वास तब होगा जब सभी विस्थापित पंडित वापस आएंगे, लेकिन निस्संदेह यह एक शुरुआत है। संजय कौल नाम के एक अन्य कश्मीरी पंडित ने कहा, यह हमारी प्रमुख मांग थी जो पूरी हुई। आज चार जिलों में उद्घाटन हो रहा है, यह एक मील का पत्थर है। हम प्रशासन के आभारी हैं।