जम्मू-कश्मीर के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तारा चंद समेत 17 नेता शुक्रवार को गुलाम नबी आजाद का साथ छोड़कर वापस कांग्रेस में लौट आए। इस दौरान पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल, जम्मू- कश्मीर की प्रभारी रजनी पाटिल, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इन सभी नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि ये साथी दो माह के लिए छुट्टी पर चले गए थे।
कांग्रेस छोड़ने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर तारा चंद ने कहा, हम भावनाओं और दोस्ती में बह गए और जल्दबाजी में पार्टी छोड़ दी थी। हम डीएपी में सहज नहीं थे क्योंकि हमने अपने जीवन के 50 साल कांग्रेस में बिताए हैं और अपनी गलती का अहसास किया है। पार्टी छोड़ना हमारी सबसे बड़ी गलती थी।
पीरजादा सईद मोहम्मद ने कहा कि वह 50 साल तक कांग्रेस के नेता रहे और पार्टी छोड़ना एक गलती थी और हम भावनाओं में बह गए। हम कश्मीर के लोगों और पार्टी से माफी मांगते हैं। जम्मू-कश्मीर में सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूत करने और एकजुट करने की जरूरत है, जहां पिछले 8 वर्षों में आतंकवाद कम होने के बजाय बढ़ा है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री तारा चंद, पूर्व मंत्री पीरजादा सईद मोहम्मद, पूर्व विधायक बलवान सिंह, पूर्व एमएलसी मुज्जफर पर्रे, एमके भारद्वाज, नरेश शर्मा, अमरीश मगोत्रा, भूषण डोगरा। तारा चंद सहित कई वरिष्ठ नेता हाल ही में डीएपी में शामिल हुए थे।
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस में शामिल हुए तीन वरिष्ठ नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इन नेताओं के अब कोई निर्वाचन क्षेत्र नहीं हैं। मैं उनके खिलाफ नहीं हूं और वे हमारे पुराने साथी रहे हैं, लेकिन जब परिसीमन हुआ तो तीनों नेताओं के निर्वाचन क्षेत्र चले गए, कोई आरक्षित तो कोई बिना आरक्षित हो गए।
मैंने उन्हें पद दिए थे क्योंकि वे हमारे पुरानी साथी थे, वे चुनाव नहीं लड़ सकते, मगर हमने उन्हें सम्मान दिया, लेकिन उनको वो हजम नहीं हुआ। शायद अब जहां गए हैं उन्हें उनके खाली पद के बारे में मालूम है, लेकिन यह नहीं पता कि उनके निर्वाचन क्षेत्र चले गए हैं।